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रिवाज: बीकानेर में मामा ने भांजों की शादी में भरा एक करोड़ 56 लाख रुपये का मायरा, हनुमान बेनीवाल भी हुए शामिल

Mon, 03 Nov 2025 06:52 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बीकानेर

सार

Bikaner News: बीकानेर जिले में भाइयों ने बहन के बेटों की शादी में 1 करोड़ 56 लाख रुपये का मायरा भरा, जिसकी चर्चा हर जगह हो रही है। नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने कार्यक्रम में शामिल होकर भाइयों की भावना की सराहना की।
 
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सांसद हनुमान बेनीवाल ने मायरा भरने पर की दोनों भाइयों की सराहना - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजस्थान की लोक परंपराएं अपने संवेदनात्मक जुड़ाव और पारिवारिक स्नेह के लिए जानी जाती हैं। इन्हीं परंपराओं में से एक है ‘मायरा’, जिसमें भाई अपनी बहन के बच्चों की शादी में प्रेम, आदर और समर्पण के भाव से उपहार, वस्त्र और धन लेकर पहुंचते हैं। इस परंपरा की झलक बीकानेर जिले के नोखा क्षेत्र के सीनियाला गांव में देखने को मिली, जहां भाइयों ने मायरे में ऐसा योगदान दिया कि यह पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया।

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दो भाइयों ने भरा 1 करोड़ 56 लाख का मायरा
गांव के निवासी भंवर लेघा और जगदीश लेघा ने अपनी बहन मीरा के दो बेटों की शादी में 1 करोड़ 56 लाख रुपये का मायरा भरा। इसमें 1 करोड़ 11 लाख रुपये नगद, सवा किलो चांदी और 31 बरी सोना शामिल था। सोना-चांदी का यह कुल मूल्य लगभग 45 लाख रुपये आंका गया है। इस मायरे ने न केवल गांव बल्कि पूरे जिले में चर्चा का माहौल बना दिया।
 
परिवार का पहला मायरा, बनाया यादगार आयोजन
भंवर लेघा जेपी कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड के संचालक हैं। उन्होंने बताया कि उनके परिवार में दो भाई और तीन बहनें हैं। यह परिवार का पहला मायरा था और उन्होंने इसे यादगार व भावनात्मक रूप से विशेष बनाने के लिए पूरा मन लगाकर योगदान दिया। उनका कहना था कि यह केवल परंपरा नहीं, बल्कि बहन के प्रति प्रेम और सम्मान की अभिव्यक्ति है।
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कार्यक्रम में पहुंचे जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण
इस भव्य आयोजन में नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल भी शामिल हुए। उन्होंने भाइयों द्वारा निभाई गई परंपरा की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह राजस्थान की सांस्कृतिक जड़ों और पारिवारिक मूल्यों का जीवंत उदाहरण है। समारोह में बड़ी संख्या में ग्रामीण, रिश्तेदार और समाज के गणमान्य लोग उपस्थित रहे। आयोजन के दौरान पूरे गांव में उत्सव और भावनात्मक माहौल देखने को मिला।
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रियासत काल से चली आ रही परंपरा, आज भी जीवित
राजस्थान में मायरा की परंपरा रियासत काल से चली आ रही है। विशेषकर बीकानेर और मारवाड़ क्षेत्र में इसे सम्मान, स्नेह और सामाजिक बंधन का प्रतीक माना जाता है। हर साल यह परंपरा नए रिकॉर्ड बनाती है और इस बार भी सीनियाला गांव का मायरा अपनी भव्यता और भावनात्मक जुड़ाव के कारण प्रदेशभर में चर्चा का विषय बन गया है।

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