बीकानेर के पुष्करणा समाज के सामूहिक सावे को लेकर शहर के हर गली-मोहल्ले में धूम है। पूरे शहर में देर रात तक मांगलिक कार्यों की चहल-पहल रही। इस सामूहिक सावे में आज एक साथ सैकड़ों शादियां होंगी। प्रत्येक दो साल में होने वाले इस सामूहिक विवाह समारोह को लेकर पूरा परकोटा दुल्हन की तरह सजा दिया गया है।
देर रात तक निकलती रही गणेश परिक्रमा
पुष्करणा सावे को लेकर समाज में गणेश परिक्रमा निकालने की परंपरा है। इसमें वेदमंत्रों के साथ दूल्हा-दुल्हन की अपनी-अपनी गणेश परिक्रमा निकाली जाती है। पहले कन्या पक्ष से गणेश परिक्रमा(छींकी) निकाली जाती है, इसके बाद दूल्हे के घर से छींकी निकलती है, जो दुल्हन के घर तक आती है। शहर में शनिवार को देर रात तक गणेश परिक्रमा की धूम रही।
आज सुबह से मायरा और खिरोड़ा की परंपरा निभाई जाएगी। शाम ढलने से पहले बारातें निकलनी शुरू होंगी। इस दौरान खिड़किया पाग पहने विष्णु रूपी दूल्हे का सम्मान करने का रिवाज है, जिसके तहत सबसे पहले निकलने वाले दूल्हे को सम्मानित किया जाएगा।
सैकड़ों साल पुरानी है परंपरा
पुष्करणा समाज के लोगों का कहना है कि समाज में सामूहिक विवाह समारोह की यह परंपरा सैकड़ों साल पुरानी है। इसमें समय-समय पर कई बदलाव भी हुए हैं। इस समारोह में भागीदारी करने के लिए सैकड़ों परिवार कोलकाता, मुंबई, दिल्ली, चेन्नई समेत अन्य महानगरों से यहां आते हैं।