मातृभाषा दिवस के अवसर पर राजस्थान की पहचान, राजस्थानी भाषा को आधिकारिक मान्यता दिलाने की मांग तेज हो गई है। प्रदेश भर में बोली जाने वाली इस भाषा को दूसरी राजभाषा बनाने में सरकार की उदासीनता से आक्रोशित लोगों ने बीकानेर में अनोखा विरोध प्रदर्शन किया। मोटियार परिषद के कार्यकर्ताओं ने अपने मुंह पर ताला लगाकर सरकार के खिलाफ सांकेतिक प्रदर्शन किया।
उनका कहना था कि सरकार राजस्थानी भाषा की मांग पर पूरी तरह मौन हो चुकी है। इसलिए अब वे भी अपनी आवाज बंद करके विरोध जता रहे हैं। परिषद के प्रमुख रामावतार उपाध्याय ने कहा, मुंह पर ताला लगाना सिर्फ प्रतीकात्मक विरोध है। अगर हमें किसी दूसरी भाषा को अपनाने के लिए मजबूर किया जा रहा है, तो बेहतर है कि हम अपनी मातृभाषा राजस्थानी को ही अपनाएं।
गौरतलब है कि राजस्थानी भाषा को मान्यता दिलाने की मांग वर्षों से की जा रही है, लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। भाषा प्रेमियों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि जब राजस्थान के लोगों की अपनी भाषा को सरकारी स्तर पर पहचान नहीं मिलेगी, तो यह सांस्कृतिक रूप से एक बड़ी क्षति होगी।इस अनूठे विरोध प्रदर्शन ने सरकार के प्रति जनता की नाराजगी को और अधिक उजागर कर दिया है। अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या सरकार इस प्रतीकात्मक विरोध से कोई सबक लेगी और राजस्थानी भाषा को उसका उचित दर्जा दिलाने की दिशा में कोई कदम उठाएगी या नहीं।