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Bikaner News: बेसहारा गोवंश की कब्रगाह बना कांजी हाउस, भूख-प्यास से तड़प रहीं गायें, शव को नोंचते दिखे कुत्ते

Sat, 05 Apr 2025 12:58 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बीकानेर

सार

गोवंश संरक्षण को लेकर नगर निगम द्वारा संचालित कांजी हाउस की स्थिति इतनी गंभीर है कि कई गोवंश तो मरणासन्न हालत में हैं और कइयों की मौत हो चुकी है। मौके पर हुई जांच में कांजी हाउस में 15 पशु मृत मिले, जबकि एक मृत पशु के शव को तो कुत्ते नोंचते दिखाई दिए।
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कांजी हाउस बना बेसहारा गोवंश की कब्रगाह
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विस्तार
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शासन-प्रशासन द्वारा गोवंश संरक्षण को लेकर किए जा रहे दावों की पोल बीकानेर में खुलती नजर आ रही है। नगर निगम द्वारा संचालित कांजी हाउस अब बेसहारा पशुओं की कब्रगाह बन चुका है। यहां न तो चारा-पानी की समुचित व्यवस्था है और न ही देखभाल का कोई प्रबंध। स्थिति इतनी गंभीर है कि कई गोवंश तो मरणासन्न हालत में हैं और कइयों की मौत हो चुकी है।

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हाल ही में मौके पर हुई जांच में कांजी हाउस में 15 पशु मृत मिले, जबकि दर्जनों की हालत अत्यंत खराब पाई गई। एक मृत पशु के शव को कुत्ते नोंचते दिखाई दिए, जिससे वहां की बदहाली और प्रशासनिक लापरवाही साफ जाहिर होती है। कांजी हाउस की क्षमता 2300 पशुओं की है लेकिन यहां देखभाल के नाम पर सिर्फ औपचारिकता निभाई जा रही है। कई हिस्सों में कांजी हाउस के दरवाजे बाहर से बंद मिले, जिनके भीतर गायों की मौत हो रही थी।

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स्थिति की जानकारी मिलने पर बीकानेर पश्चिम विधायक जेठानंद व्यास मौके पर पहुंचे और वहां के हालात देखकर वहां मौजूद ठेकेदार को कड़ी फटकार लगाई। विधायक ने बताया कि उन्हें लगातार इस मामले में शिकायत मिल रही थी कि कांजी हाउस में रोजाना 20 से 25 गोवंशीय पशुओं की मौत हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई दिन से गायों को चारा और पानी नहीं दिया गया। सुबह 9 बजे तक भी पशुओं के लिए कोई इंतजाम नहीं था।

विधायक व्यास ने मामले की सूचना नगर निगम आयुक्त मयंक मनीष को फोन पर दी, जिस पर आयुक्त ने दोषी ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया। बताया जा रहा है कि पिछले एक सप्ताह में सैकड़ों गोवंशीय पशु दम तोड़ चुके हैं लेकिन निगम के किसी अधिकारी ने मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लेना जरूरी नहीं समझा।
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बेजुबान जानवरों की हर दिन हो रही मौतों का मामला प्रशासनिक लापरवाही और संवेदनहीनता को उजागर करता है। इसके साथ ही सवाल उठता है कि आखिर गोवंश संरक्षण के नाम पर खर्च की जा रही राशि जा कहां रही है?

 

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