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Bhilwara News: अंधविश्वास की भेंट चढ़ी मासूम, निमोनिया से तड़पती मासूम को डाम से दागा, अस्पताल में भर्ती

Wed, 27 May 2026 05:33 PM IST
भीलवाड़ा ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भीलवाड़ा

सार

जिले में अंधविश्वास की वजह से एक साल की मासूम बच्ची की हालत गंभीर हो गई। निमोनिया से पीड़ित बच्ची का अस्पताल में इलाज कराने के बजाय परिजनों ने उसके शरीर पर डाम लगा दिया, जिसके बाद तबीयत बिगड़ने पर उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
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निमोनिया से पीड़ित बच्ची को डाम से दागा, अस्पताल में भर्ती - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जिले में मानवता को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां निमोनिया से पीड़ित एक साल की मासूम बच्ची को आधुनिक इलाज के बजाय अंधविश्वास की भेंट चढ़ा दिया गया। बीमारी ठीक करने के नाम पर बच्ची के शरीर पर गर्म लोहे या किसी गर्म वस्तु से डाम लगाया गया, जिससे उसकी हालत और ज्यादा बिगड़ गई। बाद में परिजन उसे महात्मा गांधी चिकित्सालय लेकर पहुंचे, जहां बच्ची को चिल्ड्रन वार्ड में भर्ती कर उपचार किया जा रहा है।

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जानकारी के अनुसार बच्ची कई दिनों से निमोनिया से पीड़ित थी। उसे सांस लेने में तकलीफ और तेज बुखार की शिकायत थी। परिजनों ने अस्पताल ले जाने के बजाय कथित देसी उपचार और अंधविश्वास का सहारा लिया। आरोप है कि बच्ची के शरीर पर डाम लगाने के बाद उसकी तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी। हालत गंभीर होने पर परिजन उसे जिला अस्पताल लेकर पहुंचे।

महात्मा गांधी चिकित्सालय के अधीक्षक डॉ. अरुण गौड़ ने बताया कि बच्ची को चिल्ड्रन वार्ड में भर्ती किया गया है। उसे निमोनिया की शिकायत है और डाम लगाने के कारण उसकी स्थिति और अधिक खराब हो गई। डॉक्टरों की टीम लगातार उसकी निगरानी कर रही है और उपचार जारी है।
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डॉ. गौड़ ने इस घटना को अंधविश्वास और जागरूकता की कमी का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी कई लोग गंभीर बीमारियों का इलाज झाड़-फूंक और डाम जैसी खतरनाक परंपराओं से कराने में विश्वास रखते हैं।

उन्होंने कहा कि गांव स्तर पर व्यापक जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है, ताकि लोग समझ सकें कि निमोनिया जैसी बीमारियों का इलाज केवल डॉक्टरों और अस्पतालों में ही संभव है। महिला एवं बाल विकास विभाग, चिकित्सा विभाग और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जाना चाहिए।
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इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में फैले अंधविश्वास और स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता की कमी को उजागर कर दिया है। सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने ऐसे मामलों को रोकने के लिए विशेष जनजागरूकता अभियान चलाने की मांग की है।

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