जिले के भाकलिया गांव स्थित सरकारी स्कूल में स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के दौरान दो दलित व्यक्तियों के साथ जातिगत दुर्व्यवहार का मामला सामने आया है। आरोप है कि कार्यक्रम में कुर्सियों पर बैठे दोनों लोगों को जातिसूचक शब्द कहे गए और उन्हें कुर्सियों से उठाकर जमीन पर बैठने के लिए मजबूर किया गया। मामले में पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
शिकायत के मुताबिक 15 अगस्त को गांव के सरकारी स्कूल में आयोजित स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के दौरान भाकलिया निवासी रामेश्वरलाल बैरवा और गोपीलाल बैरवा, जो कि अनुसूचित जाति समुदाय से हैं, समुदाय के अन्य लोगों के साथ कुर्सियों पर बैठे थे। आरोप है कि इसी दौरान गांव के ही बालू वैष्णव, हीरालाल शर्मा, नारायण जाट, रामेश्वर जाट और प्रकाश जाट वहां पहुंचे और कथित तौर पर जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कुर्सियों पर बैठने का विरोध किया।
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एफआईआर के अनुसार आरोपियों ने उनसे कहा कि वे कुर्सियों पर न बैठें और जमीन पर जाकर बैठें। विरोध करने पर उन्हें कथित तौर पर धमकाया गया और जबरन कुर्सियों से नीचे उतार दिया गया। यह भी आरोप लगाया गया है कि घटना स्कूल के बच्चों, शिक्षकों और अन्य ग्रामीणों की मौजूदगी में हुई, जिससे दोनों को अपमान और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि उन्हें स्थानीय आंगनबाड़ी केंद्र बंद कराने की धमकी भी दी गई। उनके मुताबिक आंगनबाड़ी केंद्र में अनुसूचित जाति समुदाय की दो महिलाएं कार्यकर्ता और सहायिका के तौर पर काम करती हैं।
पुलिस ने शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। मामले की जांच डीएसपी राहुल जोशी को सौंपी गई है। पुलिस के अनुसार मामले में आगे की जांच जारी है। आरोपों की पुष्टि जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।