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डूंगरपुर: भाजपा-कांग्रेस की सियासी दोस्ती, सबसे बड़ी पार्टी बीटीपी फिर भी नहीं बना पाई जिला प्रमुख

Thu, 15 Oct 2026 10:08 AM IST
बांसवाड़ा ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, डूंगरपुर

सार

राजस्थान के डूंगरपुर जिले में पिछले पंचायतीराज चुनाव के दौरान भाजपा और कांग्रेस के बीच बने राजनीतिक गठजोड़ ने सबको चौंका दिया था। जिला परिषद की 27 सीटों में भारतीय ट्राइबल पार्टी (बीटीपी) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन वह जिला प्रमुख का पद हासिल नहीं कर सकी।
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प्रमुख की कुर्सी पर बैठकर नमन करतीं सूर्या अहारी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजस्थान के डूंगरपुर जिले में पंचायतीराज चुनावों के दौरान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस के बीच राजनीतिक मुकाबला होता रहा है। दोनों दलों की विचारधारा अलग-अलग है, लेकिन पिछले पंचायतीराज चुनाव में जिले में ऐसा राजनीतिक समीकरण बना, जिसने सभी को चौंका दिया। जिला परिषद की 27 सीटों पर हुए चुनाव में भारतीय ट्राइबल पार्टी (बीटीपी) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन इसके बावजूद वह अपना जिला प्रमुख नहीं बना सकी। भाजपा को कांग्रेस के सदस्यों का समर्थन मिला और दोनों दलों के गठबंधन से भाजपा की सूर्या अहारी जिला प्रमुख बन गईं। इस घटनाक्रम की राजनीतिक हलकों में काफी चर्चा हुई थी।

धुर विरोधी भाजपा और कांग्रेस आए साथ

पिछले पंचायतीराज चुनाव में डूंगरपुर जिला परिषद के 27 वार्डों में भाजपा, कांग्रेस और बीटीपी के बीच त्रिकोणीय मुकाबला हुआ था। जिला प्रमुख की कुर्सी पर कब्जा करने के लिए तीनों दलों ने पूरी ताकत लगा दी थी। चुनाव परिणाम में बीटीपी सबसे बड़े दल के रूप में सामने आई और उसने जिला प्रमुख पद पर अपना दावा पेश किया। हालांकि, जिला प्रमुख के चुनाव के दौरान ऐसे राजनीतिक समीकरण बने कि सभी हैरान रह गए। भाजपा के आठ सदस्यों को कांग्रेस के छह सदस्यों का समर्थन मिल गया। इस गठजोड़ की मदद से भाजपा ने जिला प्रमुख की कुर्सी पर कब्जा कर लिया। वहीं, सबसे बड़ी पार्टी बनने के बावजूद बीटीपी को विपक्ष में बैठना पड़ा।

ऐसा रहा जिला प्रमुख चुनाव का गणित

जिला प्रमुख पद के चुनाव में भाजपा की सूर्या अहारी ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में अपना नामांकन दाखिल किया। वहीं, बीटीपी की ओर से पार्वती डोडा और कांता देवी ने पर्चा भरा। हालांकि, कांता देवी का प्रस्तावक जिला परिषद सदस्य नहीं होने के कारण उनका नामांकन खारिज कर दिया गया। इसके बाद मुकाबला सूर्या अहारी और पार्वती डोडा के बीच रह गया। मतदान में बीटीपी के सभी सदस्यों ने पार्वती डोडा के पक्ष में वोट दिया। दूसरी ओर, भाजपा के आठ और कांग्रेस के छह सदस्यों ने एकजुट होकर सूर्या अहारी के समर्थन में मतदान किया। इस तरह सूर्या अहारी जिला प्रमुख चुन ली गईं। जिला परिषद की कुल 27 सीटों में से सबसे अधिक सीटें जीतने वाली बीटीपी जिला प्रमुख की कुर्सी हासिल नहीं कर सकी। इस घटनाक्रम ने जिले की राजनीति में भाजपा और कांग्रेस के बीच बने समीकरण को चर्चा का विषय बना दिया।

पंचायत समितियों में भी दिखा भाजपा-कांग्रेस गठजोड़

जिला परिषद के अलावा पंचायत समितियों के चुनाव में भी भाजपा और कांग्रेस के बीच गठजोड़ का असर देखने को मिला। गलियाकोट, सीमलवाड़ा और सागवाड़ा में कांग्रेस के सहयोग से भाजपा ने अपने प्रधान बनवाए। गलियाकोट में बीटीपी के एक सदस्य ने मतदान नहीं किया। इसके बाद पर्ची डालकर हुए निर्णय में भाजपा के पक्ष में परिणाम आया। आसपुर में कांग्रेस के तीन सदस्यों ने भाजपा के पक्ष में मतदान किया। वहीं, सागवाड़ा में कांग्रेस के चार सदस्यों के वोट मिलने से भाजपा अपना प्रधान बनाने में सफल रही।

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 बिछीवाड़ा में समीकरण इसके उलट रहे। यहां भाजपा के दो और बीटीपी के एक सदस्य के वोटों के समर्थन से कांग्रेस अपना प्रधान बनाने में सफल रही। इस तरह डूंगरपुर जिले के पिछले पंचायतीराज चुनाव में जिला परिषद से लेकर पंचायत समितियों तक राजनीतिक समीकरणों ने अहम भूमिका निभाई। सबसे बड़ी पार्टी बनने के बावजूद बीटीपी जिला प्रमुख का पद हासिल नहीं कर सकी, जबकि अलग-अलग पंचायत समितियों में भाजपा और कांग्रेस ने स्थानीय समीकरणों के अनुसार एक-दूसरे का समर्थन किया।

 

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