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GGTU बांसवाड़ा: राज्यपाल के साथ अधिकारी कुर्सी पर, भाजपा विधायक को खड़े रहना पड़ा; नाराज आदिवासी नेता क्या बोले?

Mon, 06 Apr 2026 03:44 PM IST
बांसवाड़ा ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांसवाड़ा

सार

GGTU Banswara Controversy: गोविंद गुरू जनजातीय विश्वविद्यालय बांसवाड़ा में शनिवार को हुई राष्ट्रीय संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया सम्मिलित हुए। संगोष्ठी के बाद हुए ग्रुप फोटो सेशन का एक फोटो वायरल होने से विवाद खड़ा हो गया है।
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गोविंद गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय विवाद - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बांसवाड़ा में गोविंद गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय में शनिवार को राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित हुई। इसमें मुख्य अतिथि के रूप में पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया सम्मिलित हुए। संगोष्ठी के बाद हुए ग्रुप फोटो सेशन का एक फोटो वायरल होने से विवाद खड़ा हो गया है। फोटो में राज्यपाल के साथ कुर्सी पर कुलगुरु और विश्वविद्यालय के अधिकारी बैठे हैं, जबकि भारतीय जनता पार्टी के विधायक कैलाश मीणा पीछे कतार में खड़े हैं। अपनी अनदेखी पर गुस्साए विधायक का कहना है कि वे सही समय और स्थान पर जवाब देंगे। दूसरी ओर भारत आदिवासी पार्टी ने इसे आदिवासियों का अपमान बताया है।

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गोविंद गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय में विकसित भारत के निर्माण में शिक्षकों की भूमिका विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी हुई थी। संगोष्ठी के बाद ग्रुप फोटो खिंचवाया गया। इसमें राज्यपाल कटारिया के साथ कुलगुरु केशवसिंह ठाकुर, कुलसचिव कश्मीकौर, वित्त नियंत्रक उदयसिंह मीणा बैठे हैं, जबकि पीछे विश्वविद्यालय के कार्मिकों के साथ साफा पहने विधायक कैलाश मीणा खड़े हैं। इस फोटो के वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। कुलगुरु ठाकुर ने विवाद सामने आने के बाद सारा ठीकरा व्यवस्थाओं में लगे कार्मिकों पर फोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि असम्मान की बात नहीं है, किंतु व्यवस्था में लगे कार्मिकों को ध्यान देना चाहिए था।

 

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गोविंद गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय - फोटो : अमर उजाला
गलत हुआ, मनमर्जी चल रही
इस मामले में विधायक कैलाश मीणा ने कहा कि गुलाबचंद कटारिया उनके राजनीतिक गुरु हैं। उनके पास खड़े रहना सम्मान की बात है, लेकिन जो हुआ, वह गलत हुआ है। विश्वविद्यालय में मनमर्जी चल रही है। सही समय और सही स्थान पर जवाब देंगे। जवाब देने के कई रास्ते हैं। इस मामले से वे राज्यपाल को भी अवगत कराएंगे।

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बीएपी ने आरएसएस को भी लपेटा
इस मामले को भारत आदिवासी पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष मोहनलाल रोत ने भुनाते हुए इसे आदिवासियों का अपमान बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर लिखा है कि आदिवासी विधायक कैलाश मीणा खड़े हैं और आरएसएस के गैर आदिवासी लोग कुर्सी पर बैठे हैं। मीणा भाजपा से दूसरी बार विधायक बने हैं। अभी बांसवाड़ा की पांच सीटों में वही एकमात्र भाजपा से विधायक हैं। कुर्सी पर बैठने वालों में एक भी आदिवासी नहीं है। उन्होंने पूछा कि जनजातीय विश्वविद्यालय में आदिवासी प्रतिनिधि के साथ ऐसा क्यों हो रहा है?

सम्मान के साथ खिलवाड़
रोत ने विधायक के प्रोटोकाॅल के नियम का उल्लेख कर कहा है कि आरएसएस आदिवासियों को कठपुतली की तरह रखती है। आदिवासी नेताओं के सम्मान के साथ खिलवाड़ किया जाता है। उन्होंने विश्वविद्यालय में प्रतिनियुक्त प्रोफेसर को हटाने, अस्थायी कार्मिकों को हटाने, आदिवासी को कुलगुरु बनाने और विधायक के प्रोटोकाॅल को तोड़ने वाले कार्मिकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
 
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