विशेष न्यायालय बांसवाड़ा।
पुलिस जांच और कोर्ट में प्रक्रिया
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई कर नाबालिग आरोपी को हिरासत में लिया और उसके खिलाफ किशोर न्याय बोर्ड में आरोप पत्र दाखिल किया। मामले में संज्ञान लेने के बाद मामला पॉक्सो कोर्ट में स्थानांतरित किया गया।
विशिष्ट लोक अभियोजक हेमेन्द्रनाथ पुरोहित ने बताया कि सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं। अभियोजन पक्ष ने मजबूत सबूत और गवाह पेश किए, जिसके आधार पर कोर्ट ने नाबालिग आरोपी को दोषी ठहराया। इस मामले में पीड़िता की हिम्मत और वनकर्मी की मदद ने जांच को तेज करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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कोर्ट ने दिया कठोर फैसला
न्यायाधीश तारा अग्रवाल ने सभी सबूतों और दलीलों का गहन विश्लेषण करने के बाद नाबालिग आरोपी को दोषी करार दिया। कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता की धारा 363 (अपहरण) के तहत तीन वर्ष का कठोर कारावास और पांच हजार रुपये का जुर्माना, धारा 366 (विवाह के लिए अपहरण) के तहत चार वर्ष का कठोर कारावास और 10 हजार रुपये का जुर्माना, धारा 344 (गलत बंधन) के तहत दो वर्ष का कठोर कारावास और पांच हजार रुपये का जुर्माना तथा पॉक्सो एक्ट के तहत 20 वर्ष का कठोर कारावास और 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। जुर्माना न चुकाने की स्थिति में आरोपी को एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।