राजस्थान में नगर निकाय चुनाव की घोषणा हो गई है। बांसवाड़ा जिले में तीन निकाय हैं और यहां दो चरणों में मतदान होगा। पहले चरण में 9 सितंबर को बांसवाड़ा नगर परिषद के लिए मतदान होगा। वहीं कुशलगढ़ और परतापुर-गढ़ी में 11 सितंबर को वोट डाले जाएंगे।
बांसवाड़ा नगर परिषद में इस बार पहली बार अनुसूचित जनजाति वर्ग से सभापति बनेगा। चुनाव को लेकर भाजपा, कांग्रेस और भारत आदिवासी पार्टी ने तैयारियां तेज कर दी हैं। तीनों दल चुनावी रणनीति बनाने में जुटे हैं। हालांकि अभी किसी भी पार्टी ने प्रत्याशियों के नामों की घोषणा नहीं की है। बांसवाड़ा नगर परिषद में इस बार मुकाबला त्रिकोणीय माना जा रहा है
बांसवाड़ा नगर परिषद में 94 हजार से अधिक मतदाता
बांसवाड़ा नगर परिषद में कुल 94,058 मतदाता हैं। इनमें 47,151 पुरुष और 46,901 महिला मतदाता हैं। 18 से 35 वर्ष की उम्र वाले 23,995 युवा मतदाता भी इस चुनाव में अहम भूमिका निभाएंगे। नगर परिषद में कुल 60 वार्ड हैं। वर्तमान में नगर परिषद में कांग्रेस का बोर्ड है। 60 वार्डों में कांग्रेस के 36, भाजपा के 21 और अन्य दलों के तीन पार्षद हैं।
20 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित
आरक्षण के तहत नगर परिषद के 4 वार्ड अनुसूचित जाति, 9 वार्ड अनुसूचित जनजाति, 12 वार्ड ओबीसी और 35 वार्ड सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित हैं। इनमें 20 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। आरक्षण में बदलाव के कारण कई मौजूदा पार्षदों के सामने वार्ड बदलने की चुनौती है। भाजपा नगर अध्यक्ष का वार्ड सामान्य से ओबीसी हो गया है। वहीं कांग्रेस प्रदेश सचिव का वार्ड भी ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित हो गया है। ऐसे में दोनों दलों समेत अन्य पार्टियां नए चेहरों की तलाश में जुटी हैं। टिकट तय करते समय वार्डों के जातिगत समीकरण को भी ध्यान में रखा जा रहा है।
पढे़ं: 'खत्म हो चुका है पुराना वर्चस्व': मालवीय के कांग्रेस में लौटने पर डामोर का तंज, बोले- जनता नए नेतृत्व की ओर
कांग्रेस के सामने बोर्ड बचाने की चुनौती
पिछले चुनाव में कांग्रेस ने बहुमत के साथ नगर परिषद में बोर्ड बनाया था। वहीं पिछले छह चुनावों में चार बार भाजपा बोर्ड बनाने में सफल रही है। भाजपा इस बार अपना खोया हुआ बोर्ड हासिल करने के लिए पूरी ताकत लगा रही है। भारत आदिवासी पार्टी के चुनाव मैदान में उतरने से इस बार मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। भाजपा का फोकस खास तौर पर सामान्य और ओबीसी वार्डों पर है, जबकि कांग्रेस अपने मौजूदा बोर्ड के काम और संगठन के आधार पर चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है।
छह चुनावों में चार बार भाजपा का बोर्ड
बांसवाड़ा नगर परिषद में 1994, 1999, 2004 और 2014 में भाजपा का बोर्ड रहा। वहीं 2009 और 2019 में कांग्रेस ने बोर्ड बनाया। अब 2026 के चुनाव में तीन प्रमुख दलों के बीच मुकाबले से राजनीतिक समीकरण बदलने की संभावना है।
सड़क, सफाई और पानी प्रमुख मुद्दे
बांसवाड़ा नगर परिषद क्षेत्र में सड़क, सफाई और पेयजल की समस्याएं इस चुनाव में प्रमुख मुद्दे बन सकती हैं। शहर के मुख्य मार्गों के साथ कई वार्डों में सड़कें खस्ताहाल हैं। नियमित सफाई नहीं होने और कचरा सेंटरों से समय पर गंदगी नहीं उठने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं।
डंपिंग यार्ड को शहर से बाहर ले जाने का काम भी अभी अधूरा है। कचरे में आग लगने के कारण भीतरी शहर में धुएं और दुर्गंध से लोगों को परेशानी होती है। इसके अलावा साफ पानी की नियमित आपूर्ति भी चुनौती बनी हुई है। कई इलाकों में पीले पानी की समस्या को लेकर लोग परेशान हैं। ऐसे में सड़क, सफाई और पेयजल से जुड़े मुद्दे चुनाव में राजनीतिक दलों के लिए अहम रहेंगे।