साइबर पुलिस ने एक बड़े अंतरराज्यीय ऑनलाइन ठगी नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई 1 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 तक चलाए गए विशेष अभियान ‘ऑपरेशन म्यूल हंटर’ के तहत की गई। अभियान का उद्देश्य फर्जी बैंक खातों के माध्यम से संचालित साइबर ठगी के रैकेट को तोड़ना था।
जांच के दौरान पुलिस के सामने ‘हर्ष ट्रेडिंग’ नाम का एक बैंक खाता सामने आया, जो इस पूरे नेटवर्क का मुख्य केंद्र था। शुरुआती जांच में स्पष्ट हुआ कि यह खाता केवल नाममात्र का व्यापारिक खाता था, जबकि इसका वास्तविक उपयोग ठगी की रकम को इकट्ठा करने और आगे ट्रांसफर करने के लिए किया जा रहा था।
21 शिकायतें, 82 लाख से अधिक का लेनदेन
साइबर थाना प्रभारी हरिओम मीणा के अनुसार, इस खाते से जुड़े देशभर में कुल 21 शिकायतें दर्ज हुई हैं। इन मामलों में करीब 16.40 लाख रुपये की ठगी की रकम इसी खाते में जमा होने की पुष्टि हुई है। शिकायतें मुख्यतः फर्जी कॉल, लिंक के जरिए फ्रॉड और निवेश के नाम पर धोखाधड़ी से संबंधित हैं। जिन मामलों में पीड़ितों ने अभी तक औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं करवाई है, उन संदिग्ध लेनदेन को जोड़ने पर करीब 65.70 लाख रुपये की अतिरिक्त राशि इसी खाते में घूमती पाई गई। इस तरह कुल मिलाकर 82 लाख रुपये से अधिक का संदिग्ध लेनदेन सामने आया है।
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चार आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने मामले में बांसवाड़ा जिले के चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें हर्ष जोशी (22), निवासी मशावटी नागरी, हिमांशु शर्मा (40) विकास विजयवर्गीय, निवासी वाड़िया कॉलोनी, अनील बाथम (28), निवासी अंबावाड़ी कल्याण कॉलोनी है। जांच में सामने आया कि हर्ष जोशी के नाम पर बैंक खाता खुलवाया गया था, लेकिन वह केवल नाममात्र का खाताधारक था। खाते का वास्तविक संचालन अन्य आरोपी तकनीकी और नेटवर्किंग माध्यमों से कर रहे थे।
ऐसे करते थे ठगी
गिरोह के सदस्य लोगों को विभिन्न तरीकों से झांसे में लेते थे। जैसे ही पीड़ित पैसे ट्रांसफर करता, रकम तुरंत “हर्ष ट्रेडिंग” खाते में पहुंच जाती थी। इसके बाद रकम को कई हिस्सों में बांटकर अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था या नकद निकाल लिया जाता था।
कई राज्यों से जुड़े ट्रांजेक्शन
जांच में यह भी सामने आया कि इस खाते में गुजरात के अहमदाबाद, महाराष्ट्र के पुणे और तेलंगाना सहित कई राज्यों से लगातार लेनदेन हो रहा था। इससे स्पष्ट है कि यह गिरोह अंतरराज्यीय स्तर पर सक्रिय था और अलग-अलग राज्यों के लोगों को निशाना बना रहा था।
नेटवर्क की जांच जारी
साइबर पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की गहन जांच में जुटी है। आरोपियों के मोबाइल फोन, बैंक डिटेल्स और डिजिटल डिवाइस की जांच की जा रही है, ताकि गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों और खातों का पता लगाया जा सके। साथ ही संभावित पीड़ितों की पहचान कर उन्हें न्याय दिलाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।