राज्यपाल कलराज मिश्र ने 30 स्टूडेंट्स को गोल्ड मेडल और 11 को पीएचडी उपाधि दी।
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राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा है कि दीक्षांत शिक्षा का अंत नहीं नए जीवन का प्रवेश द्वार है। उन्होंने विश्वविद्यालयों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ मौलिक शोध संस्कृति से जुड़ने का आह्वान किया। मिश्र ने जनजातीय विश्वविद्यालय को रिसर्च प्रोजेक्ट्स के तहत आदिवासी अंचलों की परंपराओं और संस्कृति को सहेजने पर भी जोर दिया। मिश्र बांसवाड़ा में गोविंद गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में संबोधित कर रहे थे।
30 टॉपर को गोल्ड मैडल, 11 शोधार्थियों को पीएच.डी
राज्यपाल कलरज मिश्र ने दीक्षान्त समारोह में उपाधि प्राप्त करने वाले छात्रों की अपेक्षा छात्राओं की संख्या ज़्यादा होने पर खुशी जताते हुए कहा कि यह बालिका शिक्षा के क्षेत्र में एक सुखद और सराहनीय पहल है। कलराज मिश्र ने समारोह में 30 टॉपर को गोल्ड मैडल, 11 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि दी।
न्यू एजुकेशन पॉलिसी के मुताबिक एंप्लॉयमेंट देने वाले कोर्स तैयार करे यूनिवर्सिटी
मिश्र ने विश्वविद्यालय को नई शिक्षा नीति के तहत ऐसे कोर्स बनाए की ज़रूरत जताई, जिनसे आदिवासी क्षेत्रों की प्रकृति संरक्षण परंपराओं को आगे बढ़ाया जा सके। उन्होंने शोध की ऐसी परियोजनाओं पर काम करने की भी जरूरत बताई, जिससे लोक संस्कृति, परंपराओं को आधुनिक नज़रिया मिल सके। उन्होंने रोजगार दिलाने वाले कोर्स तैयार करने, स्किल डेवलपमेंट और स्टूडेंट सेंट्रिक ऐसी एक्टिविटीज चलाने को कहा जिससे स्टूडेंट का ओवरऑल डेवलपमेंट हो सके।
जनजाति क्षेत्र में शिक्षा स्तर में क्रान्ति आई
समारोह में जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री अर्जुनसिंह बामनिया ने कहा कि गोविन्द गुरु जनजाति विश्वविद्यालय के खुलने से जनजाति क्षेत्र में शिक्षा स्तर में क्रान्ति आई है। उन्होंने युवाओं से कहा कि राज्य सरकार शिक्षा के क्षेत्र में ओवरऑल डवलपमेंट कर रही है और हायर एजुकेशन को लेकर कई योजनाओं को शुरु किया है। जिसका समय पर फायदा लें और अपनी एजुकेशन को स्पीड अप करें। समारोह में विश्वविद्यालय के कुलपति आईवी त्रिवेदी ने राज्यपाल और कुलाधिपति कलराज मिश्र को स्वागत करते हुए विश्वविद्यालय की विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी।