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Rajasthan: ‘आधी रात का तुगलकी फरमान जनता से...’, बाड़मेर-बालोतरा सीमा फेरबदल पर भड़के पूर्व CM अशोक गहलोत

Sun, 04 Jan 2026 09:22 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बालोतरा

सार

Balotra News: बाड़मेर-बालोतरा जिलों की सीमा में किए गए फेरबदल पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने नाराजगी जताई है। उन्होंने इसे ‘तुगलकी फरमान’ बताते हुए कहा कि बायतु व गुड़ामालानी का जिला बदलना अव्यावहारिक है और यह फैसला जनहित नहीं, सियासी उद्देश्य से लिया गया है।
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बाड़मेर और बालोतरा की सीमाओं में किए गए फेरबदल पर पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने की कड़ी निंदा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजस्थान में बाड़मेर और बालोतरा जिलों की सीमाओं में किए गए ताजा फेरबदल को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस निर्णय पर कड़ा एतराज जताते हुए राज्य की भाजपा सरकार को कटघरे में खड़ा किया है। गहलोत ने इसे न केवल प्रशासनिक दृष्टि से अव्यावहारिक बताया, बल्कि आमजन के हितों के खिलाफ लिया गया फैसला करार दिया है।

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पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए लिखा कि 31 दिसंबर की मध्यरात्रि को आनन-फानन में किया गया यह सीमा फेरबदल राज्य सरकार का एक और ‘तुगलकी फरमान’ है। उन्होंने सवाल उठाया कि इतने महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव को बिना सार्वजनिक संवाद और जमीनी परिस्थितियों को समझे क्यों लागू किया गया।

'जनता को राहत नहीं, उल्टा बढ़ी परेशानी'
गहलोत ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि बायतु विधानसभा क्षेत्र को बाड़मेर जिले में तथा गुड़ामालानी-धोरीमन्ना को बालोतरा जिले में शामिल करने का फैसला पूरी तरह अतार्किक है। उनका कहना है कि इस बदलाव से जिन लोगों को राहत मिलनी चाहिए थी, उनकी समस्याएं और बढ़ गई हैं।
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उन्होंने विशेष रूप से गुड़ामालानी क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि जिला मुख्यालय की दूरी घटने के बजाय और अधिक बढ़ गई है, जिससे आम नागरिकों को प्रशासनिक कार्यों, स्वास्थ्य सेवाओं और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में अतिरिक्त दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। गहलोत ने इसे सीधे तौर पर जनता के साथ अन्याय बताया।

'यह फैसला प्रशासनिक नहीं, राजनीतिक है'
पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि यह निर्णय जनसुविधा के लिए नहीं, बल्कि आगामी परिसीमन और राजनीतिक समीकरणों को साधने के उद्देश्य से लिया गया है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के फैसलों में जनता की जरूरतों से ज्यादा राजनीतिक लाभ प्राथमिकता में नजर आ रहा है।

गहलोत ने याद दिलाया कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में नए जिलों का गठन ‘प्रशासन को जनता के द्वार तक पहुंचाने’ की सोच के साथ किया गया था, ताकि दूर-दराज के क्षेत्रों के लोगों को राहत मिल सके। लेकिन मौजूदा सरकार उस सोच को पलटते हुए जनभावनाओं को दरकिनार कर रही है।

भाजपा सरकार पर तीखा तंज
अपने बयान में अशोक गहलोत ने भाजपा सरकार पर तीखा तंज कसा कि मौजूदा सरकार जनहित के बजाय केवल ‘सियासी रोटियां सेंकने’ में व्यस्त है। उन्होंने कहा कि बिना जमीनी अध्ययन, जनप्रतिनिधियों से संवाद और स्थानीय लोगों की राय लिए इस तरह के फैसले लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ हैं।

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आधी रात में आदेश, फिर बदला जिलों का भूगोल
गौरतलब है कि राज्य सरकार ने 31 दिसंबर की देर रात आदेश जारी कर बाड़मेर और बालोतरा जिलों की सीमाओं में पुनः बदलाव किया। इसके तहत बायतु विधानसभा क्षेत्र को बाड़मेर जिले में शामिल किया गया, जबकि गुड़ामालानी विधानसभा क्षेत्र को बालोतरा जिले का हिस्सा बनाया गया। इस फैसले के बाद दोनों जिलों का भूगोल एक बार फिर बदल गया, जिससे स्थानीय स्तर पर भ्रम और असंतोष की स्थिति बन गई है।
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'जनविरोधी निर्णय की कड़ी निंदा'
अशोक गहलोत ने अपने बयान के अंत में स्पष्ट शब्दों में कहा कि कांग्रेस पार्टी इस निर्णय की कड़े शब्दों में निंदा करती है और जनहित से जुड़े ऐसे मामलों में सरकार को अपने फैसलों पर पुनर्विचार करना चाहिए। उन्होंने मांग की कि सीमा निर्धारण के इस आदेश को वापस लेकर जनता की सुविधा को केंद्र में रखकर दोबारा समीक्षा की जाए।

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