राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में बालोतरा के तिलवाड़ा गांव में एक भव्य पथ संचलन का आयोजन किया गया। यह ऐतिहासिक आयोजन भरड़कोट महंत सेवानाथ महाराज एवं गुलाब पुरी महाराज के सान्निध्य में संपन्न हुआ। पथ संचलन में स्वयंसेवकों ने पूरे अनुशासन और जोश के साथ भाग लिया, जिसमें उन्होंने देशभक्ति, राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता और अनुशासन का संदेश दिया।
तिलवाड़ा गांव में पथ संचलन पहुंचने पर ग्रामीणों ने वेद मंत्रों के उच्चारण के साथ स्वयंसेवकों का अभिनंदन किया। गांव के विभिन्न स्थानों पर महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों ने रंगोली बनाकर आयोजन को भव्यता प्रदान की। स्वयंसेवकों पर जगह-जगह पुष्पवर्षा की गई, जिससे माहौल पूरी तरह देशभक्ति के रंग में रंग गया।
पथ संचलन के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 99 वर्षों के गौरवशाली इतिहास को याद किया गया। साथ ही पंच प्रण, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी आंदोलन, कुटुंब प्रबोधन, नागरिक कर्तव्य, शिष्टाचार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर लोगों का ध्यान आकर्षित किया। इस अवसर पर वक्ताओं ने स्वयंसेवकों को वर्तमान में देश के सामने आने वाली चुनौतियों से अवगत कराया और बताया कि भारतीय संस्कृति, परंपराओं और गौरवशाली इतिहास को बनाए रखना ही हमारा मुख्य उद्देश्य होना चाहिए।
स्वयंसेवकों को प्रेरित करने के लिए मावजी महाराज, बिरसा मुंडा, गोविंद गुरु, मामा बालेश्वर दयाल, राणा पूंजा, महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी, टांट्या भील, कालीबाई, संत हरिदास, मीरा बाई और महर्षि वाल्मीकि जैसे महान विभूतियों के आदर्शों को अपनाकर हमें समाज और राष्ट्र के उत्थान में योगदान देने के लिए प्रेरित किया गया।
इस अवसर पर स्वयंसेवकों को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प दिलाया गया। वक्ताओं ने बताया कि डॉ. हेडगेवार ने 1925 में संघ की स्थापना इस उद्देश्य से की थी कि राष्ट्र को एकता, अनुशासन और सामाजिक समरसता की मजबूत डोर से जोड़ा जाए।
पथ संचलन हनुमान वाटिका से प्रारंभ होकर गांव के विभिन्न प्रमुख मार्गों से होकर गुजरा और पुनः हनुमान वाटिका में आकर संपन्न हुआ। पथ संचलन का नेतृत्व जसोल ब्लॉक के सरवाहक सुरेश पालीवाल के निर्देशन में किया गया, जिसमें तिलवाड़ा मंडल प्रमुख पुखराज पालीवाल सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।