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Bundi: अडानी विल्मर फैक्ट्री में गंवाए दोनों पैर, न पेंशन मिली न नौकरी, बाबूलाल ने राष्ट्रपति से लगाई गुहार

Sat, 25 Mar 2023 07:42 AM IST
अर्पित याज्ञनिक न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बूंदी

सार

अडानी फैक्ट्री में श्रमिक के दोनों पैर कटने के 18 वर्ष बाद भी न पेंशन शुरू हुई, न बेटे को नौकरी मिली। राजीनामा कराकर कंपनी ने दिया धोखा। पीड़ित श्रमिक ने राष्ट्रपति के नाम एडीएम को ज्ञापन देकर लगाई न्याय की गुहार।
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पीड़ित श्रमिक बाबूलाल - फोटो : Amar Ujala Digital
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विस्तार
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बूंदी अडानी विल्मर फैक्ट्री के खिलाफ बूंदी के सदर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया साथ ही अडानी विल्मर को दोषी मानते हुए चालान पेश किया जा चुका था।

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बूंदी की अडानी विल्मर फैक्ट्री में श्रमिक बाबूलाल रैगर फिटर के पद पर कार्यरत था। मशीनों में खराबी आने के बाद कई बार प्रबंधन को चेताया भी गया, लेकिन अडानी विल्मर के प्रबंधन की उदासीनता की कीमत बाबूलाल को अपने दोनों पैर देकर चुकानी पड़ी। 

साल 2004 में फैक्ट्री के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज हुआ और अडानी विल्मर फैक्ट्री प्रबंधन को दोषी मानते हुए कोर्ट में चालान भी पेश किया गया, लेकिन अडानी विल्मर प्रबंधन ने धूर्तता दिखाते हुए बाबूलाल को विश्वास में लेकर कोर्ट में राजीनामा कर लिया। इलाज के लिए कुछ पैसे चेक के माध्यम से दिए गए। समझौते के अनुसार बेटे को नौकरी तो दी लेकिन ठेका के माध्यम से। बाबूलाल ने असंतुष्टता जाहिर की तो बेटे को भी नौकरी से निकाल दिया। रही बात पेंशन की तो दुर्घटना के 18 वर्ष बाद भी बेरोजगार बाबूलाल अपने परिवार के साथ आस लगाए बैठा है की कभी तो न्याय मिलेगा।
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दुर्घटना में अपने दोनों पैर पूरी तरह गंवाकर विकलांग बने श्रमिक को घटना के 18 वर्ष बाद भी न्याय नहीं मिल सका। कभी दोनों पैरों पर चलने वाला श्रमिक बाबूलाल रेगर शुक्रवार को जब ट्राई साइकिल चलाते हुए बूंदी जिला कलेक्ट्रेट पहुंचा तो उसकी आंखों में आंसू थे। बाबूलाल ने शुक्रवार दोपहर को कार्यवाहक जिला कलेक्टर मुकेश चौधरी को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन देकर न्याय की गुहार लगाई।

मैं जन्मजात विकलांग नहीं
जिला कलक्ट्रेट में बाबूलाल रेगर ने भावुक होकर कहा कि मैं कोई जन्मजात विकलांग नहीं हूं। दुर्घटना से पहले फैक्ट्री वालों से भी कई बार कहा था की मशीनें सही से काम नहीं कर रही किसी दिन बड़ी दुर्घटना हो जाएगी, लेकिन किसी ने नहीं सुनी। जिससे अडानी विल्मर फैक्ट्री में काम करते हुए भरी जवानी में दोनों पैर पूरी तरह कट गये और जिंदगी अपने आप पर एक बोझ बन गयी।यह कहते हुये अडानी विल्मर फैक्ट्री के संचालकों की लापरवाही से अपने दोनों पैर गंवाने वाले श्रमिक बाबूलाल रेगर फिर भावुक हो गया।

न पेंशन दी और न ही बेटे को नौकरी दी
राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू के नाम दिए ज्ञापन में बाबूलाल ने कहा कि अडानी विल्मर फैक्ट्री के संचालकों ने दुर्घटना के बाद उसे आजीवन पेंशन और उसके पुत्र को स्थाई नौकरी देने का वादा कर अदालत में राजीनामा करवा लिया। कुछ समय तक बेटे को फैक्ट्री पर ठेके पर काम पर रखा और स्थायी नौकरी की बात की तो वहां से भी निकाल दिया। परिवार के भरण-पोषण के लिए कंपनी की ओर से आजीवन पेंशन देने का वादा किया था, लेकिन 18 वर्ष के बाद भी आज तक पेंशन चालू नहीं की गई है।

आत्महत्या का विचार आता हैं- बाबूलाल
श्रमिक बाबूलाल रेगर ने जिला कलेक्ट्रेट में कहा कि वह 18 वर्ष से अडानी विल्मर फैक्ट्री के चक्कर लगा रहा है लेकिन अब तो उसे गेट पर भी अंदर नहीं घुसने देते हैं। इधर, उसके परिवार की भूखे मरने की नौबत आ गई है। उस समय तो कंपनी की ओर से बड़े-बड़े वादे किए गए थे लेकिन अब कोई सुध लेने वाला नहीं है। श्रमिक ने दुखी होकर कहा कि मजबूरी में अब आत्महत्या करने  का विचार आता हैं।
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तत्काल पेंशन शुरू की जाए
राजस्थान बीज निगम के निदेशक चर्मेश शर्मा ने अडानी विल्मर कंपनी से तत्काल पीड़ित श्रमिक को 18 वर्ष की पेंशन देने की मांग की है। शर्मा ने कहा श्रमिक के दोनों पैर अडानी विल्मर फैक्ट्री में काम करते हुये 2004 में कट गए थे। अभी तक पेंशन शुरू नहीं करना और आश्रित  को नौकरी नहीं देना अमानवीय है जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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