राजस्थान विधानसभा का तीन दिन चला सत्र कांग्रेस व भाजपा की खींचतान के बीच शुक्रवार को समाप्त हो गया। इस दौरान कोई सार्थक बहस नहीं हो सकी। सरकार ने हंगामे के बीच अपने 13 विधेयक पारित करवाए।
भाजपा ने कांग्रेस सरकार पर जानबूझकर छोटा सत्र रखवाने का आरोप लगाया और इसे लोकतंत्र की हत्या भी कहा। नेता प्रतिपक्ष वसुंधरा राजे के नेतृत्व में भाजपा व कुछ निर्दलीय विधायकों ने सत्र बढ़ाने के लिए राज्यपाल मार्र्गेट अल्वा को ज्ञापन दिया। कांग्रेस ने अपनी जिद के चलते सिर्फ तीन दिन सत्र चलाया, तो भाजपा ने तीनों दिन विरोध प्रदर्शनों व बहिष्कार में निकाल दिए।
अंतिम दिन शुक्रवार को भाजपा ने सदन का बहिष्कार किया और जितने समय प्रश्नकाल चला उतने समय भाजपा विधायक सदन के बाहर धरने पर बैठे रहे। इसके बाद भाजपा विधायकों ने राजभवन तक सरकार विरोधी तख्तियां लेकर मौन जलूस निकाला। भाजपा ने जिन मुद्दो पर राज्यपाल को ज्ञापन दिया उनमें विपक्ष की लगातार मांग के बावजूद सदन में अविश्वास प्रस्ताव और मत विभाजन की सहमति नहीं देना मुख्य था। विपक्ष बिजली, कानून व्यवस्था, महंगाई, भ्रष्टाचार और एफ डीआई जैसे मुद्दों पर बहस करने पर अड़ा हुआ था।