राजस्थान से लगते भारत-पाक के रेगिस्तानी बॉर्डर पर भी जोरदार उथल-पुथल मची हुई है। ये पाकिस्तानी सेना नहीं, बल्कि भाजपा के दिग्गज नेता जसवंत सिंह के पार्टी से बागी हुए पुत्र विधायक मानवेंद्र सिंह मचा रहे हैं। भाजपा-कांग्रेस की दिल्ली में बैठी आलाकमान ही नहीं, बल्कि पूरे देश के राजनीतिक विश्लेषक भी मारवाड़ क्षेत्र में हो रहे इस राजनीतिक उथल-पुथल पर निगाहें जमाए हुए हैं।
राजस्थान में भाजपा के इस विधानसभा चुनाव के लिए 180 सीटें जीतने वाले लक्ष्य 'मिशन 180' को मारवाड़ क्षेत्र से खासी चुनौती मिलने वाली है। मानवेंद्र कह चुके हैं कि कमल का फूल, हमारी भूल। जसवंत सिंह को पिछले लोकसभा चुनाव में टिकट नहीं दिए जाने की घटना याद दिलाते हुए उन्होंने यह भी कहा कि अब उसी अंदाज में बदला लिया जाएगा।
इधर, मानवेंद्र की पत्नी चित्रा सिंह ने कहा था कि सरकार को उखाड़ फेंको। इस परिवार के साथ यहां के लोगों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं, ऐसे में ये बगावती तेवर भाजपा को अच्छा खासा नुकसान पहुंचा सकते हैं।
मुट्ठी से फिसल सकती हैं ये रेतीली सीटें
राजस्थान में थार रेगिस्तान के बॉर्डर पर दशकों से भाजपा की राजनीति करने वाले जसवंत सिंह के परिवार ने भाजपा के खिलाफ बगावत का बिगुल बजा दिया है। मारवाड़ में मानवेंद्र सिंह के पिता एनडीए सरकार में पूर्व विदेश मंत्री रहे जसवंत सिंह का जबदस्त प्रभाव रहा है। यदि मारवाड़ के मतदाताओं की भावनाएं जोर मार गईं, तो ये सीटें भाजपा की मुट्ठी से फिसल सकती हैं।
राजस्थन की 200 विधानसभा सीटों में अकेले मारवाड़ क्षेत्र के जोधपुर संभाग में 33 सीटें आती हैं और नागौर जिले को भी शामिल कर दिया जाए तो यह संख्या 43 हो जाती है। ये कहना गलत नहीं होगा कि वर्ष 2013 में हुए विधानसभा चुनाव में इन सीटों पर भाजपा ने एक तरफा जीत हासिल की।
यहां जसवंत सिंह के गृह जिले बाड़मेर में 7 विधानसभा सीटों में से भाजपा को 6 सीटें मिली थीं। वहीं जोधपुर में 5 में से 4 सीटों पर भाजपा ने कब्जा जमाया था। कांग्रेस को यहां से एक सीट दिग्गज नेता अशोक गहलोत ही दिलवा पाए थे।
साथ ही, जैसलमेर की दोनों सीटें, पाली की सभी 6 सीटें, सिरोही की तीनों सीटें और जालौर की दोनों सीटें भाजपा ने जीतीं। नागौर में भी भाजपा का तूफान रहा और 10 में से 9 सीटें जीतीं और एक सीट भाजपा के बागी निर्दलीय चुनाव लड़े हनुमान बेनीवाल ने जीती। यहां भी कांग्रेस के हाथ खाली रहे।