टैक्स डिपार्टमेंट से व्यापारी जितना दूर रहे, उतना अच्छा है। सरकार भी यही चाहती है। यह बात वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शनिवार को यहां जीएसटी काउंसिल की 10वीं बैठक के दौरान पत्रकारों के सवाल के जवाब में कही। उनके इस बयान से यह जाहिर हो रहा है कि सरकार इंस्पेक्टर राज को कम करना चाहती है। जेटली ने कहा कि व्यापारी चिंता न करें। जीएसटी उनकी परेशानी कम करने के लिए है। अब तक अलग-अलग तरह के 5 टैक्सेज की गणना के लिए अलग-अलग जगह व्यापारी को दौड़ना पड़ता था, अब सिर्फ एक ही गणना करनी होगी। यही सबसे बड़ी राहत की बात होगी।
उन्होंने साफ कहा कि जहां तक सेल्स व टैक्स डिपार्टमेंट के अधिकारों में कमी आने की बात की जा रही है, तो यह सही है और ऐसा होना भी चाहिए। जेटली ने वास्तविक लागत मूल्य को छिपाने की आशंका पर किए गए सवाल पर भी साफ किया कि अब ऐसा करना बहुत मुश्किल होगा क्योंकि सरकार ऐसा साॅफ्टवेयर तैयार कर रही है जिससे वास्तविक लागत मूल्य को छिपाना लगभग मुमकिन नहीं होगा।
दरअसल, यह आशंका जताई जा रही है कि जीएसटी से टैक्स कम होने पर भी निर्माता अपनी वस्तुओं की कीमत कम न करते हुए लागत मूल्य को ज्यादा दिखा सकता है और उस वस्तु पर कम हुए टैक्स के अंतर का लाभ उसी की जेब में डाल सकता है। ऐसे में आम जनता को क्या फायदा होगा। इस पर जेटली का यह बयान थोड़ा राहत देने वाला है कि सरकार इस बिन्दु पर भी गंभीर है और ऐसा करने वालों पर लगाम कसने की तैयारी की जा रही है।