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अर्जुन के सारथी नहीं बनेंगे उनसे टक्कर लेंगे गोपाल, एक पूर्व आईएएस तो दूसरा पूर्व आईपीएस

Fri, 03 May 2019 02:35 AM IST
Avdhesh Kumar समीर शर्मा, बीकानेर
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बीजेपी कांग्रेस
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कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा के विवादित जमीन खरीद मामले को लेकर सुर्खियों में रहने वाले बीकानेर के चुनावी समर में केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल का सामना उनके मौसेरे भाई मदन गोपाल मेघवाल से हो रहा है। साइकिल से संसद जाने वाले अर्जुनराम आईएएस रहे हैं, तो उनके मौसेरे भाई पूर्व आईपीएस हैं। 
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अर्जुनराम ने 2014 में मोदी लहर में लगातार दूसरी बार रिकॉर्ड मतों से चुनाव जीता था। वहीं, मदन गोपाल पहला चुनाव लड़ रहे हैं। मदन गोपाल के सामने तीन लोकसभा चुनाव से लगातार हार रही कांग्रेस का परचम फिर से लहराने की चुनौती है। बीकानेर भाजपा का पुराना गढ़ है। अर्जुनराम से पहले अभिनेता धर्मेंद्र यहां से भाजपा के टिकट पर जीत चुके हैं। हालांकि इस बार अर्जुनराम की राह कठिन नजर आ रही है। 

भाई से ज्यादा भितरघात का डर

इस बार अर्जुनराम मेघवाल को भाई का सामना करने के साथ ही राह में कांटे बिछा रहे अपनी पार्टी के नेताओं से जूझना पड़ रहा है। ऐसे में भाई से ज्यादा डर भितरघात का है। यहां से सात बार विधानसभा चुनाव जीत चुके दिग्गज राजपूत नेता व राजस्थान के पूर्व मंत्री देवीसिंह भाटी ने भी उनके खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है। भाटी का बीकानेर पूर्व, कोलायत और नोखा में अच्छा प्रभाव है, जिसका नुकसान भाजपा को उठाना पड़ सकता है।
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मुद्दे

भाजपा: टीम मोदी में शामिल अर्जुनराम राष्ट्रीय मुद्दों, प्रधानमंत्री को दूसरी बार मौका देने के साथ वाड्रा मुद्दे को जमकर उछाल रहे हैं।
कांग्रेसः मदन गोपाल बीकानेर में विकास के अभाव, मोदी सरकार की नाकामी और कांग्रेस की न्याय योजना के सहारे मैदान में हैं।

दो विचारधाराओं के बीच चुनाव

यह दो विचारधाराओं के बीच चुनाव है। एक तरफ वो शक्तियां हैं, जो देशद्रोह की धारा हटाना चाहती हैं। दूसरी तरफ भाजपा है, जो राष्ट्र को सर्वोच्च स्थान देती है। मोदी सरकार में देश और बीकानेर दोनों का विकास हुआ है।
-अर्जुनराम मेघवाल, प्रत्याशी, भाजपा

भाजपा राज में केवल झूठे वादे किए
मोदी सरकार में केवल झूठे वादे मिले, धरातल पर काम नहीं हुए। भाजपा से जनता का विश्वास उठ चुका है। जनता जान चुकी है कि कौन काम करने वाला है और कौन केवल वादे करने वाला। इस चुनाव में भाजपा को भारी नुकसान होगा।
-मदन गोपाल मेघवाल, प्रत्याशी, कांग्रेस
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विधायक भी साथ नहीं 

अर्जुनराम के साथ इस लोकसभा क्षेत्र में आने वाले चार भाजपा विधायक भी नजर नहीं आ रहे। उनकी शिकायत है कि अर्जुनराम ने विधानसभा चुनाव में प्रभावी तरीके से भाजपा का प्रचार नहीं किया। इस संसदीय क्षेत्र की बीकानेर (पूर्व), नोखा, लूनकरणसर और अनूपगढ़ सीटें भाजपा के कब्जे में हैं। वहीं, बीकानेर (पश्चिम), कोलायत और खाजूवाला में कांग्रेस के विधायक हैं। डूंगरगढ़ विधानसभा सीट माकपा ने जीती।

मदन लड़ना चाहते थे विधानसभा चुनाव

कांग्रेस प्रत्याशी मदन गोपाल ने दिसंबर में विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए आईपीएस की नौकरी से स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति ली थी। वह बीकानेर की खाजूवाला विस सीट से टिकट मांग रहे थे, लेकिन कांग्रस ने मौका नहीं दिया। लोकसभा में बार-बार हार का मुंह देख रही कांग्रेस को मजबूत चेहरे की तलाश थी। कांग्रेस ने भाई को टिकट देकर मुकाबले को रोचक बना दिया।

क्षेत्र में समस्याओं की कमी नहीं, लेकिन...

बीकानेर में हवाई सेवा, पासपोर्ट केंद्र, ईएसआई हॉस्पिटल की सुविधा तथा राजमार्गों के विस्तार का श्रेय अर्जुनराम के खाते में है, लेकिन शहर हो या गांव-कस्बा, समस्याओं की कमी नहीं। शहर रेलवे क्रॉसिंग की समस्या से त्रस्त है। किसान परेशान हैं कि पंजाब पानी रोकता है। थर्मल प्लांट लंबित है। डूंगरगढ़ सहित कुछ क्षेत्र उच्च शिक्षा में पिछड़े हैं। खास बात है कि लोग इन पर बात करने की जगह राष्ट्रीय मुद्दों को तवज्जो दे रहे हैं।
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