दूल्हे के पिता जालिम सिंह ने लौटाए दहेज में मिले 31 लाख रुपये
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बानसूर क्षेत्र के बिलाली गांव से दहेज प्रथा के खिलाफ एक प्रेरणादायक उदाहरण सामने आया है, जिसकी चर्चा पूरे इलाके में हो रही है। गांव के निवासी जालिम सिंह ने अपने बेटे की शादी में दहेज लेने से साफ इनकार कर समाज को सकारात्मक संदेश दिया है।
10 फरवरी को नागौर में हुआ विवाह
जानकारी के अनुसार, बिलाली निवासी जालिम सिंह के बेटे वीरेंद्र सिंह शेखावत की बारात 10 फरवरी को नागौर जिले के लुणसरा गांव गई थी। विवाह के दौरान कन्या विशाखा राठौड़ के पिता करणी सिंह राठौड़ ने दहेज स्वरूप 31 लाख रुपये देने की पेशकश की। इसी दौरान जालिम सिंह ने दहेज की राशि लेने से स्पष्ट रूप से मना कर दिया।
‘बेटी किसी भी धन से कहीं अधिक मूल्यवान’
जालिम सिंह ने कहा कि आपने अपनी बेटी हमें दी है, वही हमारे लिए सबसे बड़ा दहेज है। बेटी किसी भी धन से कहीं अधिक मूल्यवान होती है। यह कहते हुए उन्होंने दहेज की पूरी 31 लाख रुपये की राशि कन्या के पिता को लौटा दी। उनके इस निर्णय से शादी समारोह में मौजूद लोग भावुक हो गए और इस कदम की सराहना की।
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आसपास के क्षेत्रों में भी चर्चा
इस पहल की चर्चा अब केवल बानसूर तक सीमित नहीं रही, बल्कि आसपास के गांवों और क्षेत्रों में भी हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्तमान समय में दहेज को लेकर अनेक सामाजिक समस्याएं देखने को मिलती हैं, ऐसे में यह निर्णय समाज के लिए एक स्पष्ट संदेश है।
स्थानीय लोगों के अनुसार इस परिवार ने यह उदाहरण प्रस्तुत किया है कि विवाह एक पवित्र बंधन है, न कि लेन-देन का सौदा। ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने इस कदम को अनुकरणीय बताते हुए अन्य परिवारों से भी दहेज प्रथा को पूरी तरह त्यागने की अपील की है। बिलाली गांव की यह पहल आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा के रूप में देखी जा रही है।