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राजस्थान: अलवर नगर निगम में खींचतान, बिना मिले ही लौट गए मंत्री संजय शर्मा

Fri, 02 Oct 2026 03:49 PM IST
प्रतीक पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलवर

सार

अलवर नगर निगम में महापौर चुनाव के महज 10 दिन बाद कथित अंदरूनी खींचतान सामने आई है। गांधी जयंती पर नगर निगम पहुंचे वन राज्य मंत्री संजय शर्मा के स्वागत के लिए महापौर और आयुक्त मौजूद नहीं रहे। मंत्री ने गांधी और शास्त्री के चित्रों पर पुष्पांजलि अर्पित की और बिना किसी से बातचीत किए वापस लौट गए। सफाईकर्मियों की नियुक्ति का लंबित मामला भी मंत्री की नाराजगी की वजह बताया जा रहा है।
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मंत्री संजय शर्मा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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नगर निगम महापौर चुनाव के केवल 10 दिन बाद वन राज्य मंत्री संजय शर्मा और महापौर के बीच की नाराजगी सार्वजनिक रूप से सामने आ गई है। शुक्रवार को गांधी जयंती के अवसर पर नगर निगम परिसर पहुंचे वन राज्य मंत्री के स्वागत में महापौर व आयुक्त दोनों ही उपस्थित नहीं रहे। इस स्थिति से असहज होकर मंत्री महात्मा गांधी तथा पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के चित्रों पर पुष्प अर्पित करने के तुरंत बाद किसी से भी बातचीत किए बिना अपनी गाड़ी में बैठकर निकल गए।
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प्रोटोकॉल की अनदेखी और जनप्रतिनिधि
गांधी जयंती के उपलक्ष्य में नगर निगम परिसर में सफाई कर्मचारियों का सम्मान समारोह आयोजित हो रहा था। उस दौरान महापौर और आयुक्त परिसर के भीतर ही मौजूद थे। इसके बावजूद वन राज्य मंत्री संजय शर्मा के आगमन पर उनके स्वागत या प्रोटोकॉल के लिए दोनों में से कोई भी बाहर नहीं आया। मंत्री ने अकेले ही महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और लाल बहादुर शास्त्री के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की।

इसके पश्चात मंत्री सीधे अपनी कार में जाकर बैठ गए। मंत्री को बिना मिले लौटते देख महापौर के पति एवं पूर्व अध्यक्ष अजय अग्रवाल ने उनके निजी सचिव जले सिंह को रुकने का संकेत दिया। उन्होंने मंत्री को रोकने का प्रयास भी किया, परंतु मंत्री का वाहन परिसर से तेजी से बाहर निकल गया। इस दौरान उप महापौर अजय पूनिया भी अनुपस्थित रहे।
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सफाईकर्मियों की नियुक्ति से जुड़ी नाराजगी
मंत्री के इस प्रकार नाराज होकर जाने के पीछे दो मुख्य कारण बताए जा रहे हैं। पहला कारण प्रोटोकॉल का उल्लंघन है और दूसरा सफाईकर्मियों की नियुक्ति का अटका हुआ मामला है। नगर निगम चुनाव से पूर्व 12 अगस्त को वन राज्य मंत्री संजय शर्मा अभ्यर्थियों को न्याय दिलाने के लिए नगर निगम परिसर में धरने पर बैठ गए थे। उनकी मांग थी कि भर्ती प्रक्रिया पूरी कर चुके सभी 327 अभ्यर्थियों को शीघ्र नियुक्ति प्रदान की जाए। मंत्री के उस आंदोलन के बाद प्रशासन ने 30 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए थे, जिनमें से पांच अभ्यर्थियों को धरने के दिन ही पत्र दिए गए थे। इसके बावजूद इन अभ्यर्थियों को कार्यभार ग्रहण नहीं कराया जा रहा है, जिससे मंत्री असंतुष्ट चल रहे थे।

प्रशासनिक गलियारों में बढ़ी हलचल
घटनाक्रम के पश्चात महापौर के पति अजय अग्रवाल ने कहा कि मंत्री के अचानक जाने की वजह समझ में नहीं आई। उन्होंने स्पष्ट किया कि निगम और मंत्री के मध्य किसी तरह का मनमुटाव नहीं है और संभवतः उनका कोई अन्य जरूरी कार्यक्रम रहा होगा। दूसरी तरफ, वन राज्य मंत्री संजय शर्मा ने भी इस पूरे प्रकरण पर सार्वजनिक तौर पर कोई टिप्पणी नहीं की है। हालांकि, गांधी जयंती जैसे अवसर पर प्रशासनिक अधिकारियों की अनुपस्थिति ने निगम के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान को उजागर कर दिया है।
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