रियाबड़ी उपखंड में लूणी नदी के आसपास लंबे समय से अवैध बजरी खनन की शिकायतें मिल रही थीं। ग्रामीणों ने कई बार जिला स्तरीय पुलिस अधिकारियों से इस संबंध में शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। आरोप है कि पुलिस के कुछ कार्मिक बजरी माफियाओं से सांठगांठ कर करोड़ों रुपये का राजस्व नुकसान करवा रहे थे।
जब इस मामले की भनक पुलिस मुख्यालय को लगी तो उच्च अधिकारियों ने विजिलेंस टीम का गठन कर डिकॉय ऑपरेशन चलाया। इस कार्रवाई में थांवला थाना क्षेत्र के हेड कांस्टेबल चंद्रगुप्त और कांस्टेबल शंकरलाल मीणा, विजयसिंह व गोविंदराम की भूमिका संदिग्ध पाई गई। इसके बाद तत्कालीन थाना प्रभारी सूरजमल सहित सभी पांच आरोपियों को लाइन हाजिर कर दिया गया।
रेंज डीआईजी ओमप्रकाश ने बताया कि नागौर जिले में अवैध खनन की लगातार शिकायतें मिल रही थीं, जिसके चलते पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर विजिलेंस टीम ने जांच की। डिकॉय ऑपरेशन के तहत मिली रिपोर्ट में थांवला थाने के कई पुलिसकर्मी दोषी पाए गए। डीआईजी ने साफ किया कि दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इस मामले में जिला स्तरीय पुलिस अधिकारियों की निष्क्रियता पर भी सवाल उठ रहे हैं। परिवादी ने कई बार लिखित शिकायतें दी थीं, लेकिन स्थानीय स्तर पर कोई सुनवाई नहीं हुई। जब मामला पुलिस मुख्यालय तक पहुंचा, तो विजिलेंस टीम ने ऑपरेशन चलाकर सच्चाई उजागर की। इस रिपोर्ट के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है और अब अन्य एजेंसियां भी जांच में जुट गई हैं।
इस कार्रवाई से साफ हो गया है कि अवैध बजरी खनन में केवल माफिया ही नहीं, बल्कि पुलिसकर्मी भी शामिल थे। अब देखना होगा कि दोषियों पर आगे क्या कानूनी कार्रवाई होती है।
थांवला थाने के शॉर्ट्स