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Mother's Day Special: मुझे बड़ा बनाने के लिए मां ने की मजदूरी, पढ़ने जा सकूं इसलिए अपनी पीठ पर उठाती थी बोझ

Sun, 12 May 2024 09:16 PM IST
अर्पित याज्ञनिक न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर

सार

मेरी मां खुद पढ़ी लिखी नहीं थीं, लेकिन मुझे पढ़ाया। 5th क्लास में था। एक दिन मां बोलीं- तुझे बड़ा होकर कलेक्टर बनना है। उसे नहीं पता था कि कलेक्टर क्या होता है?
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प्रशिक्षु आईपीएस कांबले शरण गोपीनाथ अपनी मां के साथ। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कहा जाता है कि हर शहर में हर बस्ती आबाद नहीं होती, दीवार तो होती है मगर बुनियाद नहीं होती, मां तो मिलती है हर औलाद को बहुत अच्छी, मगर हर मां को अच्छी औलाद नहीं मिलती.... ऐसा ही एक किस्सा है महाराष्ट्र का, जहां पर एक मां ने अपने बेटे को अफसर बनाने के लिए अपना जीवन खपा दिया। आज इस मां का बेटा आईपीएस है। हम बात कर रहे हैं अजमेर जिले के पुष्कर में प्रशिक्षु आईपीएस कांबले शरण गोपीनाथ की...

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आज मदर्स डे पर अजमेर जिले के पुष्कर थाने में तैनात प्रशिक्षु आईपीएस कांबले शरण गोपीनाथ ने अपने जीवन का सबसे महत्वपूर्ण किस्सा सुनाते हुए बताया कि मेरी मां खुद पढ़ी लिखी नहीं थीं, लेकिन मुझे पढ़ाया। 5th क्लास में था। एक दिन मां बोलीं- तुझे बड़ा होकर कलेक्टर बनना है। उसे नहीं पता था कि कलेक्टर क्या होता है? बस इतना जानती थी कि कोई बड़ा अफसर होता है। मेरी मां दिनभर खेतों में पिता गोपीनाथ कांबले के साथ काम करती और शाम ढले दूसरे के खेतों में काम करने जाती थीं।

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अनाज और सब्जियों के बोरे अपनी पीठ पर लादकर मजदूरी करती थीं, ताकि मैं 10 रुपये देकर जीप में स्कूल जा सकूं। दिनभर काम के बाद रात को घर आकर भाई और मेरे लिए खाना बनाती थीं और अपने हाथों से खिलाती थीं।
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मूल रूप से महाराष्ट्र के रहने वाले ट्रेनी आईपीएस कांबले शरण गोपीनाथ अजमेर जिले के पुष्कर थाने में तैनात हैं। उन्होंने बताया कि आज उनका ये मुकाम सिर्फ उनकी मां सुधामती की मेहनत, सोच और संघर्ष के कारण ही है।

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