राजस्थान की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में कुख्यात दस्यु जगन गुर्जर की हत्या के मामले में मेडिकल बोर्ड की पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने जांच को नया मोड़ दे दिया है। रिपोर्ट में सामने आया है कि जगन गुर्जर के शरीर पर संघर्ष के कोई उल्लेखनीय निशान नहीं मिले, जबकि मौत का कारण गला घोंटने से दम घुटना बताया गया है। इस खुलासे के बाद जांच एजेंसियां अब हत्या के पीछे संभावित साजिश और जेल के भीतर की सुरक्षा व्यवस्था की गंभीरता से जांच कर रही हैं।
29 सेंटीमीटर का दबाव का निशान, गला घोंटने की पुष्टि
जवाहरलाल नेहरू अस्पताल के फोरेंसिक मेडिसिन विभाग के पांच सदस्यीय मेडिकल बोर्ड ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि जगन गुर्जर की मौत गला घोंटने से हुई। रिपोर्ट के अनुसार उसकी गर्दन पर करीब 29 सेंटीमीटर लंबा दबाव का निशान मिला। इसके अलावा गर्दन के बाएं हिस्से पर चोट और गर्दन की मांसपेशियों, थायरॉयड क्षेत्र तथा जीभ के निचले हिस्से में अंदरूनी रक्तस्राव भी पाया गया। चिकित्सकों का मानना है कि हत्या के दौरान पहले एक ओर से और फिर दूसरी ओर से पूरी ताकत लगाकर गला दबाया गया, जिससे दम घुटने से उसकी मौत हुई।
संघर्ष के निशान नहीं मिलने से गहराया रहस्य
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर संघर्ष के स्पष्ट निशान नहीं मिलने से जांच एजेंसियों के सामने कई सवाल खड़े हो गए हैं। अब यह संभावना भी जांच के दायरे में है कि हत्या पूरी योजना के तहत की गई और वारदात से पहले जगन गुर्जर को किसी तरह काबू में कर लिया गया था। जेल जैसी हाई सिक्योरिटी व्यवस्था के भीतर बिना प्रतिरोध के हत्या होना जांच का अहम विषय बन गया है।
भोजन और एफएसएल रिपोर्ट से मिल सकते हैं नए सुराग
पोस्टमार्टम के दौरान मृतक के पेट में आंशिक रूप से पचा हुआ भोजन मिला है। इसके आधार पर जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि भोजन करने के कितनी देर बाद हत्या हुई। साथ ही छोटी आंत, लीवर, दोनों किडनी और अन्य अंगों के नमूने फोरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) भेजे गए हैं। एफएसएल रिपोर्ट आने के बाद हत्या के समय और परिस्थितियों से जुड़े कई अहम तथ्य सामने आने की उम्मीद है।
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25 जून से बंद था बैरक का सीसीटीवी कैमरा
जांच के दौरान एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। पुलिस की प्रारंभिक जांच में पता चला कि जगन गुर्जर की बैरक में लगा सीसीटीवी कैमरा 19 से 24 जून तक सामान्य रूप से काम कर रहा था, लेकिन 25 जून से बंद था। कैमरे का कई दिनों तक बंद रहना अब जांच का सबसे अहम बिंदु बन गया है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि यह तकनीकी खराबी थी या किसी सुनियोजित साजिश का हिस्सा।
मुख्य आरोपी विष्णु जाट से होगी गहन पूछताछ
इस बीच मुख्य आरोपी विष्णु जाट उर्फ बौना को प्रोडक्शन वारंट के जरिए पूछताछ के लिए हिरासत में लेने की तैयारी की जा रही है। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि पूछताछ के दौरान हत्या की साजिश, वारदात की योजना और जेल के भीतर की गतिविधियों से जुड़े कई अहम खुलासे हो सकते हैं।