बारिश के बाद अजमेर के रामसेतु एलिवेटेड ब्रिज की नीचे की जमीन धंसने से उसकी मजबूती और सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए ब्रिज पर संपूर्ण आवागमन तत्काल प्रभाव से बंद करने के आदेश जारी कर दिए हैं। कोर्ट ने अजमेर कलेक्टर लोकबंधु को विशेष निर्देश देते हुए कहा है कि आमजन और वाहनों की आवाजाही तत्काल रोकी जाए। अगर, आदेश का पालन नहीं हुआ, तो जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। मामले की अगली सुनवाई कल 11 जुलाई को निर्धारित की गई है।
रामसेतु ब्रिज की गिरती गुणवत्ता और उसमें नजरअंदाज की जा रही खामियों को लेकर दो याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर वाद के बाद यह मामला प्रकाश में आया। याचिकाकर्ताओं की ओर से एडवोकेट विवेक पाराशर ने कोर्ट में पक्ष रखा। उन्होंने तर्क दिया कि ब्रिज की जर्जर हालत के बावजूद उस पर आवागमन जारी है, जो आम नागरिकों की जान के लिए खतरा बन सकता है।
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सुनवाई के दौरान नगर निगम और स्मार्ट सिटी मिशन की ओर से जवाब प्रस्तुत किया गया, जिस पर याचिकाकर्ता और प्रशासनिक पक्ष के बीच कोर्ट में तीखी बहस हुई। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। कोर्ट ने इस स्थिति को गंभीर मानते हुए कहा कि नागरिकों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
शहरवासियों में इस घटना को लेकर गहरी चिंता है। करोड़ों रुपये की लागत से बना ब्रिज इतनी जल्दी जर्जर हो जाना भ्रष्टाचार और निर्माण में लापरवाही का संकेत माना जा रहा है। कोर्ट के निर्णय के बाद जहां आमजन में राहत की भावना है, वहीं प्रशासन और निर्माण एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
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निर्माण और उद्घाटन में देरी पर हुआ था विवाद
रामसेतु एलिवेटेड रोड का निर्माण कार्य 7 जुलाई 2018 को शुरू हुआ था, जिसका शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। इस परियोजना की समयसीमा 7 जुलाई 2020 तय की गई थी, लेकिन इसे कई बार बढ़ाया गया। अंततः तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 5 मई 2023 को इसका उद्घाटन किया।
विवाद बढ़ा, स्मार्ट सिटी याचिका पर भी आया बयान
इस बीच स्मार्ट सिटी परियोजना से जुड़ी एक अन्य याचिका पर सिविल न्यायालय पश्चिम में सुनवाई हुई, जिसमें अधिवक्ता जयप्रकाश शर्मा ने कोर्ट आदेश को लेकर बयान दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि याचिकाकर्ताओं और उनके वकीलों द्वारा मीडिया में दिए गए बयानों से आमजन में भ्रम फैल रहा है। शर्मा ने कहा कि स्मार्ट सिटी परियोजना का जिम्मा आरएसआरडीसी के पास था, जिसने ठेकेदार का चयन और डिजाइन तय किया, बावजूद इसके न तो आरएसआरडीसी और न ही ठेकेदार को पक्षकार बनाया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता राजकुमार जयपाल जैसे लोग मामले में पक्षकार बनकर असल दोषियों को बचाने का प्रयास कर रहे हैं। शर्मा ने इसे न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने वाला कदम बताया और कहा कि इस पर आगे अपील की जाएगी।