अजमेर में खाली पड़े भूखंडों से कचरा मलवा उठाने की जिम्मेदारी नगर निगम की नहीं, जैसे गैर-जिम्मेदाराना बयान जो नगर निगम की महापौर ब्रजलता हाडा ने दिए हैं। उसे राजस्थान सरकार के अनुसूचित जाति आयोग के पूर्व सदस्य व पूर्व पार्षद प्रताप सिंह यादव एवं पूर्व पार्षद तारा देवी यादव ने निंदनीय बताया है।
उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति नगर निगम सीमा में रहते हैं और प्रॉपर्टी टैक्स देते हैं, उनकी क्या गलती है कि वह खाली पड़े प्लाटों में हो रही गंदगी व उसमें भर रहे गंदे पानी की बदबू से परेशान रहे। इसमें व्याप्त मच्छरों से बीमारियों के शिकार हों। अगर वह प्लाट खाली पड़े हैं तो इसमें उनके आसपास रहने वाले निवासियों की क्या गलती है।
प्रताप यादव ने कहा कि नगर निगम को चाहिए कि जिनकी समय सीमा निकल गई है और उन्होंने अपनी अवधि नहीं बढ़वाई है उन प्लाटों को अपने कब्जे में ले, उन पर नगर निगम की संपत्ति होने का बोर्ड लगाए व संबंधित को नोटिस देकर पाबंद करें कि वह अपने प्लाट पर मकान का निर्माण करें अथवा उसकी चारदीवारी कराएं। ताकि वहां कोई कचरा व रात के समय ट्रैक्टर वाहन वाले मलवा आदि खाली करके न जा सकें।
उल्लेखनीय है कि अभियंता नगर, माधव नगर, चौरसियावास रोड, माकड़ वाली रोड, वैशाली नगर, बीके कोल नगर, हरिभाऊ उपाध्याय नगर सहित आदि अनेक घनी कॉलोनी में इस प्रकार के प्लॉट पड़े हैं। जो पचासों साल पहले ऐसे प्लाटों को लेकर लोगों ने खुला छोड़ रखा है। उनका स्वामी कौन है, यह भी स्पष्ट नहीं है। इसलिए शहर की साफ-सफाई को ध्यान में रखते हुए नगर निगम को अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए सख्त कदम उठाने चाहिए, ताकि शहर का सौंदर्य भी बना है और आसपास के निवासी गंदगी से भी बचें। बाकी ऐसे गैर-जिम्मेदाराना बयान देकर जनता की समस्याओं को और बढ़ाएं।