महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय अजमेर के खेल बोर्ड में हो रहे भ्रष्टाचार रोकने और दोषियों के खिलाफ जांच कर कार्रवाई करने के लिए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद एमडीएसयू इकाई अध्यक्ष रुद्र प्रताप सिंह पीपरोली के नेतृत्व में नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन कर ज्ञापन दिया गया।
मदस विश्वविद्यालय इकाई अध्यक्ष रुद्र प्रताप सिंह पीपरोली ने बताया कि यूनिवर्सिटी द्वारा वर्ष 2024-25 के जारी खेल केलेंडर के अनुरूप आयोजित हो रही खेल गतिविधियों में खेल बोर्ड द्वारा खेलों के आयोजनों में भ्रष्टाचार और धांधलियां देखने को मिल रही हैं। हाल ही में फुटबॉल टीम का चयन भी संदेह के घेरे में है। राष्ट्रीय फुटबॉल खिलाड़ी का चयन न करना खेल बोर्ड पर सवालिया निशान है। मीडिया में भी इस प्रकार की खबरें प्रकाशित हो रही हैं, जिससे विश्वविद्यालय खेल बोर्ड पर सवाल उठने लगे हैं। मीडिया में प्रकाशित खबरों में खेल बोर्ड सचिव डॉ. दिग्विजय सिंह पर प्राइवेट महाविद्यालयों के शारीरिक शिक्षकों से मिली भगत कर भ्रष्टाचार किया जा रहा है।
बोर्ड सचिव सिंह द्वारा टीमों के चयन के लिए रुपये की भी मांग की जाती है। खेल सामग्री की खरीद-फरोख्त में भी भ्रष्टाचार सामने आ रहे है। परिचितों को उपकृत व कमीशन लेकर खेल सामग्री की खरीद की जा रही है। एबीवीपी प्रशासन का ध्यान इस ओर आकर्षित करना चाहती है। गत दिनों सामने आया है कि विश्वविद्यालय द्वारा जिन महाविद्यालयों को खेल गतिविधियों के लिए आवंटित किए गए है, उसमें भी फर्जी खिलाड़ियों को खिलाया जा रहा है। एमडीएस यूनिवर्सिटी की 37वीं इंटर कॉलेज क्रिकेट प्रतियोगिता में फर्जीवाड़ा सामने आया था। प्रतियोगिता में छात्र खिलाड़ी के रूप में एक बैंककर्मी खेला था। इसी प्रकार इंटर कॉलेज एथलेटिक्स प्रतियोगिता में भी फर्जी खिलाड़ी का प्रकरण सामने आया था। इसी प्रकार अन्य प्रतियोगिताओं में धांधलियां सामने आई हैं। विश्वविद्यालय के खेल बोर्ड में हो रहे भ्रष्टाचार को रोकने के लिए उच्च स्तरीय जांच की जाए तथा दोषी पाए जाने पर दोषी अधिकारियों और कार्मिकों के खिलाफ कानूनी व विभागीय कार्रवाई की जाए।
साथ ही खेल बोर्ड सचिव को पद से हटाया जाए। विश्वविद्यालय द्वारा महाविद्यालय को आवंटित खेलों में खिलाडिय़ों को आ रही परेशानियों की जांच कराई जाए। खेल बोर्ड के माध्यम से आयोजन महाविद्यालय को अग्रिम भुगतान किया जाए। उन महाविद्यालयों पर भी कार्रवाई की जाए, जिन्होंने खेलों में फर्जी खिलाड़ियों को खेलने का मौका दिया। एमडीएस विवि के द्वारा एक भी खेल का आयोजन नहीं करवाया जाता, सिर्फ योगा को छोड़कर, अत: विवि द्वारा खेलों का आयोजन कराया जाए। जिन प्रतियोगिताओं में सीेधे खिलाड़ियों का ऑल इंडिया के लिए चयन होता है, वह एक महाविद्यालय को ही दिए जाते है। लैब टेक्नीशियन, डॉ.असगर अली और खेल बोर्ड सचिव डॉ दिग्विजय सिंह का फर्जीवाड़ा करवाने में और मोटी रकम वसूल करने में पूरा योगदान होता है। अपनी टीम को विजेता करने के लिए खेल दिवस के 2 दिन पूर्व महाविद्यालय में प्रवेश दिया जाता है। कुलपति महोदय से मांग करते हैं कि सभी बिंदुओं पर सकारात्मक कार्रवाई करते हुए राहत पहुंचाए। यदि इन मांगों पर कोई सकारात्मक रुख नहीं अपनाया जाता है तो मजबूरन आंदोलन करना पड़ेगा, जिसकी जिम्मेदारी यूनिवर्सिटी प्रशासन की होगी।
इस अवसर पर महानगर सहमंत्री अदिति गाबा, कृष्णा ठाकुर, अमृत चौधरी, मोनू प्रजापत, वीरेंद्र जडेजा, विक्रम राठौड़ सहित अन्य विद्यार्थी और खिलाड़ी उपस्थित रहे। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता नारेबाजी करते हुए खेल सचिव के कमरे तक पहुंचे और वहीं धरने पर बैठ गए। इसके पश्चात चीफ प्रॉक्टर डॉ शिवदयाल सिंह ने दिग्विजय सिंह को फोन कर बुलाया। खिलाड़ियों ने उनके समक्ष खेल में व्याप्त भ्रष्टाचार और चयन प्रक्रिया में हुई धांधली के बारे में बताया। इसके पश्चात चीफ प्रॉक्टर को कुलपति के नाम ज्ञापन दिया गया।