अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में 29 जून को कुख्यात डकैत जगन गुर्जर की हत्या की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि वारदात के बाद आरोपी विष्णु जाट ने हत्या को आत्महत्या साबित करने की कथित कोशिश की थी। हालांकि घटनास्थल से मिले साक्ष्यों और तकनीकी जांच ने इस पूरी कहानी की पोल खोल दी।
गमछे से गला घोंटा, फिर पंखे से लटकाकर आत्महत्या दिखाने की कोशिश
जांच अधिकारियों के अनुसार आरोपी ने पहले गमछे से जगन गुर्जर का गला घोंटा। इसके बाद उसी गमछे को बैरक के पंखे से लटका दिया, ताकि पहली नजर में मामला फांसी लगाकर आत्महत्या का लगे। हालांकि, जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि बैरक का पंखा जमीन से करीब 13 फीट की ऊंचाई पर लगा है। ऐसे में जगन जैसे भारी-भरकम व्यक्ति का वहां तक पहुंचकर फंदा लगाना या उसे उस स्थिति में लटकाना व्यवहारिक रूप से संभव नहीं माना गया। यही तथ्य जांच की दिशा बदलने वाला अहम साक्ष्य बना।
सीसीटीवी कैमरे को भी किया गया निष्क्रिय करने का प्रयास
जेल प्रशासन की जांच में यह भी सामने आया कि जगन गुर्जर की विशेष सेल के भीतर लगे सीसीटीवी कैमरे के लेंस पर सफेद रंग का टूथपेस्ट जैसा पदार्थ लगा दिया गया था, ताकि अंदर की गतिविधियां रिकॉर्ड न हो सकें। हालांकि, ब्लॉक के मुख्य कैमरे की फुटेज सुरक्षित रही। फुटेज में घटना के दौरान जगन की सेल में विष्णु जाट के अलावा किसी तीसरे व्यक्ति के प्रवेश के संकेत नहीं मिले, जिससे जांच एजेंसियों को घटनाक्रम समझने में महत्वपूर्ण मदद मिली।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी हत्या के संकेत
छह सदस्यीय मेडिकल बोर्ड की प्रारंभिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया कि गले पर अत्यधिक दबाव पड़ने से करीब तीन मिनट के भीतर जगन गुर्जर की मौत हो गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, गर्दन के मध्य हिस्से में गंभीर अंदरूनी रक्तस्राव मिला है। इसके अलावा श्वासनली (ट्रेकिया) और भोजन नली (इसोफेगस) के आसपास भी गंभीर चोटों के निशान पाए गए हैं, जो गला दबाने की ओर संकेत करते हैं।
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एफएसएल रिपोर्ट का इंतजार
जांच अधिकारियों ने जगन गुर्जर के नाखूनों के नमूने भी सुरक्षित रखे हैं। अब मौत के सटीक कारण, समय और परिस्थितियों की पुष्टि एफएसएल और हिस्टोपैथोलॉजी रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।
जेल सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठे सवाल
इस घटना के बाद हाई सिक्योरिटी जेल की सुरक्षा व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है। जेल परिसर में कुल 315 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, जिनमें से 280 कैमरे चालू बताए गए हैं। बावजूद इसके, हाई सिक्योरिटी बैरक के भीतर हुई इस वारदात ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।