अजमेर दरगाह को लेकर विवाद जारी।
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राजस्थान की अजमेर दरगाह को लेकर फिर बड़ा दावा किया गया है। महाराणा प्रताप सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजवर्धन सिंह परमार ने ही यह दावा किया है। 1170 ईस्वी का नक्शा दिखाते हुए उन्होंने दरगाह में शिव मंदिर होने का दावा किया है। इसके अलावा अढाई दिन के झोपडे़ की जगह संस्कृत विद्यालय और विष्णु मंदिर होने की बात कही है।
रविवार को दिल्ली स्थित राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी कार्यालय में परमार ने प्रेसवार्ता की और 1170 ईस्वी का एक नक्शा दिखाया। जिसमें दरगाह में एक शिव मंदिर दिखाई दे रहा है। साथ ही पास में संस्कृत विद्यालय और विष्णु मंदिर भी दर्शाया गया है। उन्होंने दरगाह को लेकर मुस्लिम पदाधिकारियों की ओर से किए जा रहे सभी दावों को गलत बताया है।
परमार ने कहा, मैंने दरगाह का सर्वेक्षण कराने की मांग को लेकर सीएम अशोक गहलोत को पत्र लिखा था। मैं न तो लड़ाई कर रहा हूं और न ही दंगा कर रहा हूं। मैंने सिर्फ जांच की मांग कर रहा हूं। दरगाह के मंदिर होने के बाद से मुझे लगातार धमकियां मिल रहीं हैं। देश के अलग-अलग राज्यों के साथ पाकिस्तान और इंडोनेशिया से भी जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं, लेकिन मैं डरने वाला नहीं हूं।
इससे पहले सीएम गहलोत को लिखा था पत्र
इससे पहले राजवर्धन सिंह परमार ने सीएम अशोक गहलोत को पत्र लिखकर अजमेर दरगाह को पूर्व में हिंदू मंदिर होने का दावा किया था। साथ ही पुरातत्व विभाग से दरगाह का सर्वे कराने की मांग भी की थी। सीएम को लिखे पत्र में परमार ने दरगाह के अंदर कई जगहों पर हिंदू धार्मिक चिन्ह स्वस्तिक के निशान होने का भी दावा भी किया। इसके बाद से दरगाह को लेकर विवाद हो रहा है।
इस तरह की बातें बर्दाश्त नहीं करेंगे
दरगाह को मंदिर बताए जाने के बाद दरगाह दीवान सैयद जैनुअल आबेदीन अली खां के बेटे नसीरुद्दीन चिश्ती ने इसे सस्ती लोकप्रियता पाने का तरीका बताया। उन्होंने कहा था, 850 साल से गरीब नवाज की दरगाह हिंदू मुसलमानों की आस्था का केंद्र रही है। उन्होंने इस बात का खंडन करते हुए कहा था, गरीब नवाज के दरबार से हिंदू , मुस्लिम सहित करोड़ों लोगों की आस्था जुड़ी हुई है, इस दरबार से हमेशा अमन और मोहब्बत का पैगाम दिया गया है। इस तरह की बातों को हम बर्दाश्त नहीं करेंगे।