राजस्थान में एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) को घूस लेने के मामले में एक आरपीएस समेत आठ पुलिसकर्मियों की तलाश है। यह मामला मनोहरपुर थाने के प्रभारी रामसिंह यादव, हेडकांस्टेबल रोहिताश्व और स्पेशल टीम में तैनात कांस्टेबल का है जो गुरुवार रात से ही फरार है।
यह सभी बजरी ट्रक चालक से 25 हजार रुपये रिश्वत लेने के मामले में पकड़े गए होमगार्ड की गिरफ्तारी के बाद से लापता हैं। इससे तीन महीने पहले 13 फरवरी को झोटवाड़ा थाना प्रभारी के रीडर बत्तू खां को एक लाख रुपये लेते हुए पकड़ा गया था। जिसके बाद से झोटवाड़ा सर्किल के एसीपी आस मोहम्मद, थाना प्रभारी प्रदीप चारण और एसआई रामलाल लापता हो गए थे।
रिश्वत के एक अन्य मामले में आठ मार्च से सीबीआई जयपुर में तैनात इंसपेक्टर प्रकाश चंद और 16 मई से टोंक के पीपलू थाना प्रभारी विजेंद्र सिंह गिल फरार चल रहे हैं। इसमें सबसे बड़ा सवाल यह है कि निचले स्तर की कार्रवाई के बाद आखिर एसीबी को थाना प्रभारियों को पकड़ने में कामयाबी हासिल क्यों नहीं हो रही है। माना जा रहा है कि इनके पकड़े जाने से बड़े अधिकारियों की भूमिका की जांच की संभावना हो सकती है। इसी कारण इन्हें पकड़ा नहीं जा सका है।
इस मामले पर एसीबी के एडीजी सौरभ श्रीवास्तव ने कहा कि जो पुलिसकर्मी एसीबी के वांछित हैं उनकी तलाश के लिए विधिक कार्रवाई की जा रही है। उन्हें पकड़ने के लिए संभावित थानों की तलाश की जा रही है। इसके अलावा एसीबी हर संभव प्रयास कर रही है।
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) जयपुर में तैनात इंस्पेक्टर प्रकाश चंद पर गृह निर्माण सहकारी समिति के खिलाफ दर्ज मामले में एक पदाधिकारी को आरोपी बनाने की धमकी देकर 90 लाख रुपये और टौंक के पीपलू थाना प्रभारी विजेंद्र सिंह गिल पर दलाल की तरफ से 1.40 लाख रुपये की रिश्वत लेने का आरोप है।