राजस्थान में जेल कार्मियों ने शुक्रवार से मेस का भोजन त्याग कर भूखे पेट काम करना शुरू कर दिया है। प्रदेश की कुल 105 जेलों के सभी प्रहरी, मुख्य प्रहरी भूख हड़ताल पर चले गए हैं। जेल प्रहरी अपनी ड्यूटी निभाते हुए मेस बहिष्कार कर रहे हैं।
2017 का वेतन विसंगति समझौता नहीं हुआ लागू
अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त एकीकृत महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष गजेंद्र सिंह ने बताया कि महासंघ के नेतृत्व में यह भूख हड़ताल की गई है, क्योंकि 2017 का वेतन विसंगति समझौता राज्य सरकार ने लागू नहीं किया है। सरकार को बार-बार चेतावनी भी दी गई, लेकिन अब तक समझौता लागू नहीं किया गया है। इसलिए मजबूर होकर यह कदम उठाया गया है। गजेन्द्र सिंह राठौड़ ने आंदोलन को समर्थन देते हुए बताया कि जब तक इनकी वेतन विसंगति का निवारण नहीं किया जाता है, तब तक मेस बहिष्कार जारी रहेगा। ये प्रहरी अपनी ड्यूटी पर रहते हुए अन्न का त्याग करेंगे।
प्रदेश की तमाम जेलों में काम के बीच प्रहरियों ने छुट्टी नहीं ली है, लेकिन भूखे रहकर अनशन का गांधीवादी तरीका अपना लिया है। यह सारा मामला अफसरों की नजर में भी है, बावजूद जेल विभाग के सीनियर अफसरों ने अब तक सरकार से इस मसले पर कोई चर्चा नहीं की है।
सरकार बदल गई लेकिन मांगें पूरी नहीं हुईं
जेल कार्मिकों की पीड़ा है कि सरकारी नौकरी में रहकर वह खुलकर अपनी बात भी नहीं कह सकते हैं। काफी लंबे समय से सरकार के सामने मांगें रखी हैं। सरकार बदल गई लेकिन उनकी मांगें पूरी नहीं हो रही हैं। उनका काम भी एकदम पुलिस की तरह ही है। पुलिस जिन खूंखार अपराधी-बदमाशों को पकड़कर लाती है और कोर्ट जेल में भेजती है। जेल कर्मी उन बदमाशों के बीच ही रहते हैं। ऐसे में उनकी ड्यूटी पुलिस की तरह रिस्की, गंभीर और संवेदनशील है।
पुलिस और जेल कर्मियों की पे स्केल में काफी फर्क
सरकार ने पुलिसकर्मियों कांस्टेबल, हेड कांस्टेबल की ग्रेड-पे और जेल प्रहरी, मुख्य प्रहरी की ग्रेड-पे में अंतर कर रखा है। जेल प्रहरी चाहते हैं कि उनका ग्रेड-पे लेवल तीन से बढ़ाकर लेवल पांच की जाए। पुलिस में ग्रेड पांच चलती है। यह अंतर कई सालों से चला आ रहा है। मौजूदा कांग्रेस सरकार ने भी चुनाव से पहले यह अंतर खत्म करने की बात कही थी, लेकिन चार साल बीत जाने के बाद भी समान वेतनमान नहीं दिया गया। जेल कर्मियों ने वेतन समेत करीब सात मांगों को लेकर अनशन किया है। कुछ दिन पहले भी जेल प्रहरी और कर्मचारियों ने हाथ पर काली पट्टी बांधकर विरोध जताया था।