शमशान घाट के सेवादार धर्मपाल ने अपना 20 दिन का बच्चा सवा लाख रुपये में बेचा था। इस पैसे में पुलिस ने भी अपने हिस्सेदारी ली थी। सब इंस्पेक्टर सुभाष चंद्र, एएसआई भूपिंदर सिंह व सोमलाल ने इस केस में 40 हजार की रंगदारी शमशान घाट के सेवादार से वर्दी का रौब दिखाकर ली थी।
धर्मपाल ने अपना बच्चा बेचा था तो इसकी भनक दो महिलाओं कुलवंत कौर, राजरानी को लग गई थी, जिन्होंने पुलिस के साथ सांठगाठ थी। दोनों महिलाओं ने बस्ती बावा खेल के सब इंस्पेक्टर सुभाष, एएसआई भूपिंदर सिंह व एएसआई सोम लाल से संपर्क साधा और धर्मपाल को पुलिस ने दबके मारकर उससे 40 हजार की राशि ले ली।
एसीपी रविंदरपाल संधू ने सोमवार रात को एसआई को गिरफ्तार करने के आदेश दिए तो उसको अचानक सीने में दर्द, ब्लड प्रेशर, शुगर समेत कई बीमारियों ने घेर लिया। उसको सिविल अस्पताल ले जाया गया। सुभाष चंद्र के बारे में चिकित्सक ने भी पुलिस अधिकारियों को कहा कि अभी एसआई फिट नहीं है, वह जांच में शामिल नहीं हो सकता। अचानक इतनी बीमारियों के चंद मिनटों में आ जाने से एसीपी रविंदरपाल संधू के माथे पर बल पड़ गए हैं।
उनका कहना है कि अभी तक जांच में यह सामने आया है कि बच्चा अस्पताल की रिस्पेशनिस्ट पूजा के जरिए एक व्यापारी को बेचा गया था, जो दिल्ली का है। बहरहाल पुलिस ने धर्मपाल, पूजा, एएसआई भूपिंदर सिंह को गिरफ्तार कर लिया है जबकि सुभाष के आसपास गार्द बैठा दी गई है।
करप्शन एक्ट को भूल गए अधिकारी
पुलिस वर्दी में ड्यूटी पर तैनात तीन थानेदार सुभाष चंद्र, एएसआई भूपिंदर सिंह, एएसआई सोम लाल को पैसे वसूलने के आरोप में केस तो दर्ज कर लिया गया लेकिन केस में करप्शन एक्ट की धारा का इस्तेमाल ही नहीं किया गया। करप्शन एक्ट काफी संगीन होता है और इसके तहत नौकरी से बर्खास्त होने का प्रावधान है।
एसीपी संधू का कहना है कि यह एक्ट इसलिए नहीं लगाया गया क्योंकि इस केस में कई सिविल व्यक्ति भी थे लेकिन रिश्वत वर्दीधारी ने ली थी, इस पर वे चुप हो गए।