फिरोजपुर के गांव जल्लोके में हैंडपंप से आ रहा गंदा पानी।
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पंजाब के विधानसभा चुनाव 2022 में होने जा रहे हैं। अन्य मुद्दों के अलावा सीमांत गांव की मांग शुद्ध पेयजल की है। इस पर किसी भी सियासी पार्टी ने ध्यान नहीं दिया है। सीमावर्ती गांवों में सेहत सुविधा का भी कोई बंदोबस्त नहीं है। ये लोग प्रदूषित पानी के चलते चमड़ी रोग के अलावा कई बीमारियों से ग्रस्त हैं। सरहदी क्षेत्रों में सतलुज दरिया बह रहा है, ये कई जगहों से पाकिस्तान में प्रवेश कर दोबारा भारत में घुसता है। पाक की चमड़ा फैक्ट्रियों का गंदा पानी सतलुज में आ गिरता है, जिससे इस पानी की मार भी सीमांत गांव के लोगों को पड़ती है। ज्यादातर सीमावर्ती गांवों में लगे हैंडपंपों से पीले रंग का पानी निकलता है, जो पीने योग्य नहीं है। फिर भी लोग इसे पीने के लिए मजबूर हैं। यहां के घरों में ऊपर रखी टंकी भी पानी के पीले रंग से पीली पड़ चुकी है।
फिरोजपुर के सीमांत गांव जलोके निवासी गुरविंदर सिंह व करतार सिंह ने बताया कि हैंडपंपों के जरिए निकल रहा प्रदूषित पानी पीने योग्य नहीं है। मजबूरी में कई लोग इसे पीने के अलावा कपड़े व नहाने में इस्तेमाल कर रहे हैं। इसीलिए यहां के ज्यादातर गांवों में ग्रामीण चमड़ी रोग से ग्रस्त हैं। सेहत सुविधा का भी बुरा हाल है। गांव टेंडी वाला में एक डिस्पेंसरी बनाई थी, लेकिन आज तक उसे शुरू नहीं किया गया। गांव गट्टी राजोके में एक डिस्पेंसरी है, वहां पर भी दवाओं का अभाव है। लोगों को इलाज के लिए शहर स्थित सिविल अस्पताल जाना पड़ता है। वहां भी पहुंचते हैं तो कई बार डाक्टर नहीं बैठा होता और कई बार स्टाफ की हड़ताल होती है। ऐसी स्थिति में उन्हें भारी परेशानी उठानी पड़ती है।
ग्रामीण जसवंत सिंह ने बताया कि हुसैनीवाला बार्डर की तरफ गांव हजारा सिंह वाला, गट्टी राजोके, जल्लोके, चांदी वाला, भाने वाला, टेंडी वाला, भड़ाना, खुंदर गट्टी, कमाले वाला के अलावा और कई गांव पड़ते हैं। सभी गांवों में पानी की भारी समस्या है, जिसकी तरफ किसी भी राजनीतिक पार्टी के नेताओं ने ध्यान नहीं दिया है।