पठानकोट में सुबह 11 बजे के बाद भी चलते रहे वाहन।
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पंजाब में कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच सरकार की तरफ से हर शनिवार सुबह 11 बजे से दोपहर 12 बजे तक एक घंटे का मौन रखने का एलान किया गया था। कोरोना के कारण जान गंवाने वाले लोगों की याद में मौन रखा जाना था। कहा गया था कि इस दौरान राज्य में कोई वाहन भी नहीं चलेगा। मुख्यमंत्री ने सभी जिला प्रशासन को इस मुहिम में मार्केट कमेटियों, पंचायतों समेत आम लोगों को जोड़ने का आह्वान किया था। शनिवार 27 मार्च को पहले ही दिन पंजाब के लोग इस मुहिम को भूल गए।
पंजाब में कई जिलों में वाहन चालकों ने इस मुहिम का पालन नहीं किया। सुबह 11 से 12 बजे के बीच वाहन सड़कों पर दौड़ते दिखे। इसके बाद पुलिस ने सख्ती दिखाकर वाहनों को रोका। वहीं वाहन चालकों का कहना था कि उन्हें ऐसी किसी मुहिम की जानकारी नहीं थी। हालांकि मुहिम की घोषणा करते समय कहा गया था कि इस मुहिम में हिस्सा लेना ऐच्छिक रहेगा।
पिछले सप्ताह 19 मार्च को पंजाब में कोरोना के फैलाव को रोकने के प्रयासों के तहत मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने राज्य के सभी शैक्षणिक संस्थानों को 31 मार्च तक बंद करने और सिनेमा व शापिंग मॉल में लोगों की आवाजाही को सीमित करने के आदेश जारी किए थे। कोविड समीक्षा बैठक में यह फैसला लिया गया था।
बैठक में फैसला लिया गया था कि मेडिकल और नर्सिंग कॉलेजों समेत अन्य सभी शिक्षण संस्थान 31 मार्च तक बंद रहेंगे जबकि सिनेमा हॉल में 50 फीसदी से ज्यादा दर्शकों और शापिंग माल्स में किसी भी समय 100 से अधिक लोग प्रवेश नहीं करेंगे। मुख्यमंत्री ने लोगों से अपील की थी कि वे अपने घरों में सामाजिक गतिविधियों को अगले दो हफ्ते तक सीमित करें ताकि कोविड के प्रसार की इस नई कड़ी को तोड़ा जा सके। उन्होंने अपील की कि अपने घरों में एक साथ 10 से अधिक मेहमानों को न बुलाएं। कांग्रेस ने पंजाब में 31 मार्च तक अपनी सभी रैलियों पर भी पाबंदी लगा दी थी।