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Sangrur: सीएम निवास के सामने तीन बेरोजगारों ने की खुदकुशी की कोशिश, दो ने निगला जहर, एक ने लगाया फंदा

Sat, 16 Jul 2022 10:05 PM IST
निवेदिता वर्मा संवाद न्यूज एजेंसी, संगरूर

सार

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वह 16 जुलाई को दोपहर 12 बजे तक इंतजार करेंगे। इसके बाद कोई बड़ा एक्शन लिया जाएगा। ऐसे में यदि कोई नुकसान होता है तो उसकी जिम्मेदारी सीधे तौर पर पंजाब सरकार व प्रशासन की होगी।
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संगरूर के सिविल अस्पताल में जहर निगलने वाले प्रदर्शनकारी का चेकअप करते डाक्टर। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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अपनी मांगों को लेकर पिछले काफी समय से संगरूर स्थित मुख्यमंत्री निवास के सामने धरने पर बैठे बेरोजगारों के सब्र का बांध शनिवार को टूट गया। तीन प्रदर्शनकारियों ने खुदकुशी करने की कोशिश की। इनमें दो ने तो जहर निगल लिया, जबकि तीसरे ने फंदा लगाकर खुदकुशी करने की कोशिश की। 

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जानकारी के मुताबिक पिछले तीन महीने से मुख्यमंत्री भगवंत मान के निवास के बाहर धरने पर बैठे पंजाब पुलिस कांस्टेबल के चुने हुए उम्मीदवारों द्वारा मरणव्रत शुरू किया हुआ है। इसी दौरान धरने पर बैठे गुरदीप सिंह, जसविंदर सिंह और गुरजीत सिंह ने शनिवार को खुदकुशी करने की कोशिश की। 

जत्थेबंदी के अध्यक्ष जगदीप सिंह ने बताया कि वह पंजाब पुलिस कांस्टेबल 2016 की वेटिंग तथा 2017 की वेरिफिकेशन वाले चयनित उम्मीदवार हैं। पिछले तीन माह से मुख्यमंत्री भगवंत मान के निवास के बाहर अनिश्चितकाल के लिए धरने पर डटे हुए हैं। 14 जुलाई को सुबह धरने पर बैठी 3 लड़कियां मरणव्रत पर बैठ गईं और 15 जुलाई को उनके 7 साथी मरणव्रत पर बैठ गए। उन्होंने बताया कि मरणव्रत को शनिवार को तीन दिन और दो रातें बीत चुकी हैं, लेकिन पंजाब सरकार तथा प्रशासन की तरफ से कोई बातचीत नहीं की गई। 
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इस दौरान मरणव्रत पर बैठे तीन उम्मीदवारों में से गुरदीप सिंह ने शुक्रवार रात पहले फंदा लगाकर मरने की कोशिश की। उसे मुश्किल से रोका गया। इसके बाद मरणव्रत पर बैठे उम्मीदवार गुरजीत सिंह और जसविंदर सिंह ने कोई जहरीली वस्तु निगल ली। इस कारण दोनों को सिविल अस्पताल में भर्ती करवाया गया, जहां उनकी हालत स्थिर बनी हुई है। उन्होंने एलान किया कि जब तक उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाता, तब तक उनका मरणव्रत जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि वह 16 जुलाई को दोपहर 12 बजे तक इंतजार करेंगे। इसके बाद कोई बड़ा एक्शन लिया जाएगा। ऐसे में यदि कोई नुकसान होता है तो उसकी जिम्मेदारी सीधे तौर पर पंजाब सरकार व प्रशासन की होगी।

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