गारबेज ट्रीटमेंट प्लांट, फैक्टरी, चंडीगढ़
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नगर निगम ने गारबेज प्रोसेसिंग प्लांट प्रबंधन को पैसे नहीं दिए तो 31 मार्च को प्लांट में ताला लटका मिलेगा। ऐसे में शहर में गंदगी के ढेर लग जाएंगे। प्लांट प्रबंधन ने नगर निगम कमिश्नर को पत्र लिखकर कहा है कि प्लांट को प्रति महीने 50 लाख रुपये का घाटा हो रहा है।
प्रबंधन इस घाटे को बर्दाश्त करने में सक्षम नहीं है। इसलिए प्रतिटन एक हजार रुपये प्रबंधन को दिए जाएं। चंडीगढ़ से हर दिन करीब दो सौ 50 टन कूड़ा प्रोसेसिंग के लिए प्लांट में आता है। यहां हर दिन करीब 120 कर्मचारी काम करते हैं। 10 एकड़ क्षेत्र में फैला गारबेज प्रोसेसिंग प्लांट वर्ष 2008 में शुरू हुआ था।
शिमला से कूड़ा आना बंद...
शिमला से हर दिन प्लांट में 50 टन कूड़ा आता था। पिछले दो दिन से वहां से कूड़ा आना बंद हो गया है। प्लांट प्रबंधन और शिमला नगर निगम के बीच रेट का मामला फंसा है। रेट तय होने पर कूड़ा आना शुरू हो जाएगा।
आरडी शर्मा, महाप्रबंधक, जेपी गारबेज प्रोसेसिंग प्लांट, चंडीगढ़ ने बताया कि हमारी हायर अथॉरिटी ने नगर निगम चंडीगढ़ के कमिश्नर को पत्र लिखकर प्रोसेसिंग के लिए प्रति टन एक हजार रुपये की राशि की मांग की है। यदि राशि नहीं दी गई तो प्लांट में 31 मार्च को ताला लगाना पड़ेगा। घाटा बहुत हो रहा है। शिमला नगर निगम में कूड़ा का रेट तय हो रहा है। तय होने पर कूड़ा दोबारा आना शुरू हो जाएगा।