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लेक्चरर को बना दिया साइंस सुपरवाइजर

Wed, 01 Jan 2014 10:54 PM IST
जालंधर
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साइंस सुपरवाइजर के पद पर लेक्चरर को तैनात करने से सरकारी स्कूलों के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। साथ ही जूनियर और सीनियर की मर्यादा भी भंग हो रही है। राज्य में अधिकतर जिला हेड क्वार्टरों पर लगे साइंस सुपरवाइजर लेक्चरर हैं, जबकि नियमों के मुताबिक जिला हेड क्वार्टरों पर तैनाती पंजाब एजुकेशन सर्विसेज कैटेगिरी वन अफसर की होनी चाहिए।
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इन सुपरवाइजर को सरकार ने स्कूल का निरीक्षण करने का अधिकार दिया है। ऐसे में लेक्चरर कैटेगिरी से बने जिला साइंस सुपरवाइजर जब स्कूल में निरीक्षण करने जाते हैं तो वे अपने से सीनियर अधिकारी (क्लास वन) से जवाब-तलब करते हैं और उनको काम सिखाते हैं। इससे पंजाब एजुकेशन सर्विसेज कैटेगिरी में भारी रोष है। खास बात तो यह है कि जिन्हें जिम्मेदारी सौंपी गई है, वे 2012 में ही लेक्चरर प्रमोट हुए हैं।

हेड मास्टर यूनियन के महासचिव सुखविंदर सिंह के मुताबिक राज्य के 22 जिलों में शिक्षा विभाग ने जिला साइंस सुपरवाइजर की तैनाती कर रखी है। इनमें से सात अधिकारी ही ऐसे हैं जो नियमों के मुताबिक हैं। उनका कहना है कि इस पद के लिए महज साइंस प्रिंसिपल को ही तैनात किया जा सकता है। राज्य में 15 जिले ऐसे हैं, जिनमें साइंस विषय के लेक्चरर को ही जिला साइंस सुपरवाइजर बनाया गया है।
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ये हैं नियम
जिला साइंस सुपरवाइजर के पद पर साइंस विषय के प्रिंसिपल को ही तैनात किया जा सकता है। इस अफसर को जहां साइंस को आगे बढ़ाने के लिए सहायक प्रोजेक्ट तैयार करने होते हैं, वहीं स्कूलों की रूटीन और वार्षिक चेकिंग भी करनी होती है। यूनियन का कहना है कि इस पद को पंजाब एजुकेशन सर्विसेज रूल स्कूल एंड इसंप्पेक्शन ग्रुप-ए मुताबिक भरा जाता है।

इन स्कूलों का निरीक्षण करना होता
राज्य में 1440 के करीब सीनियर सेकेंडरी, हाई तथा मिडिल स्कूल हैं। इन सभी स्कूलों की चेकिंग करने का जिम्मा जिला साइंस सुपरवाइजर का होता है। इसके साथ ही जिला साइंस सुपरवाइजर प्राइमरी स्कूलों का भी निरीक्षण करते हैं।

कुछ खास बातें
राज्य में हैं 1440 सीनियर सेकेंडरी स्कूल।
राज्य में हैं 1723 पद पीईएस ग्रुप के लिए मंजूर।
पीईएस ग्रुप में से ही राज्य में 22 डीईओ सेकेंडरी, 22 प्राइमरी, डिप्टी डीईओ, डाइट प्रिंसिपल, चंडीगढ़ में एक सहायक डायरेक्टर तथा डाइट में सभी सीनियर लेक्चरर के पद शामिल हैं।

शिक्षा पर क्या असर पड़ रहा
लेक्चरर को जिला साइंस सुपरवाइजर बनाने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। यह नहीं राज्य सरकार ने अन्य कई विषय माहिरों को दफ्तरों में विभिन्न पदों पर तैनात किया है। इनमें डीआरपी, बीआरपी, प्रत्येक विषय मुताबिक कोआर्डिनेटर शामिल हैं। ऐसे में जब एक स्कूल से विषय माहिर दूसरी ड्यूटी पर जाता है तो उस विषय के विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होती है।

लेक्चरर हैं हेड मास्टर से भी नीचे
जिन लेक्चरर को शिक्षा विभाग ने जिला साइंस सुपरवाइजर पद पर तैनात किया है, वे हेड मास्टर से भी नीचे हैं। हेड मास्टर यूनियन के मुताबिक सबसे ऊपर प्रिंसिपल, हेड मास्टर तथा उसके बाद लेक्चरर आते हैं लेकिन लेक्चरर साइंस सुपरवाइजर के पद पर तैनात होने के बाद अपने सीनियर से सवाल करते हैं।

चहेतों को खुश करती है सरकार
बीएस भाटिया पूर्व सर्किल एजुकेशन अधिकारी का कहना है कि 40 साल पहले इन पदों (जिला साइंस सुपरवाइजर) की तैनाती की गई थी। इससे साइंस की कोई तरक्की नहीं हुई है। सरकार इन पदों के सहारे अपने चहेतों को खुश रखती है। इस पद को देखते हुए प्रत्येक विषय के अध्यापकों को जिम्मेदारी सौंप दी गई है। इन माहिरों ने अपने विषय के लिए कुछ नहीं किया है और न ही कुछ कर रहे हैं। इन पदों की तैनाती से बच्चों की पढ़ाई जरूर प्रभावित होती है। 1996 में स्कूल प्रिंसिपल तथा डीईओ का एक ही ग्रेड कर दिया गया था। यह क्लास वन अफसर हैं।

सरकार के खजाने को भी लगेगी चपत
कोर्ट ने आदेश जारी कर रखे हैं कि सरकार ने अपनी सहूलियत के लिए जिस जूनियर को सीनियर पद पर तैनात कर रखा है, वह जूनियर उस पद का वेतन लेने का हकदार भी है। इस आदेश के बाद ही शिक्षा विभाग ने समूह स्कूलों में अस्थायी रूप में तैनात प्रिंसिपल तथा बीपीईओ को हटाकर अपनी पुरानी तैनाती पर भेज दिया था। अब जिला साइंस सुपरवाइजर की ड्यूटी दे रहे लेक्चरर भी सरकार से पीईएस ग्रेड की मांग कर सकते हैं। इससे जहां बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है वहीं सरकार के खजाने पर भी बोझ बढ़ सकता है।
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