उड़ान पंखों से नहीं, हौसलों से होती है। यही कर दिखाया है जोधपुर के डॉक्टर ओमप्रकाश ने। कभी अपने परिवार का पेट भरने के लिए रेहड़ी चलाने वाले ये होनहार अब देश के सबसे प्रमुख चिकित्सा संस्थान एम्स में सर्जरी के डॉक्टर हैं।
डॉ. ओमप्रकाश ने पीजीआई चंडीगढ़ से एमएस किया है। वे शुक्रवार को पीजीआई के 33वें दीक्षांत समारोह में अपनी पत्नी के साथ राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से डिग्री लेने पहुंचे थे। इस दौरान अपनी सफलता का श्रेय उन्होंने अपनी पत्नी को दिया। बेशक मेरी पत्नी अनपढ़ हैं, लेकिन उन्होंने ही मेरी जिंदगी को संवारा है।
अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने बताया कि बचपन में ही पिता का देहांत हो गया तो नौ भाई-बहनों की जिम्मेदारी उनके ऊपर आ गई। ऐसे में पढ़ाई कर पाना भी मुश्किल था, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।
दो वक्त की रोटी के जुगाड़ के लिए उन्होंने रेहड़ी भी चलाई और मजदूर से लेकर मिस्त्री का भी काम किया। छोटी सी दुकान के जरिये भी परिवार की गाड़ी आगे बढ़ाई।
जब वे कक्षा नौ में पढ़ते थे तो उनकी शादी हो गई। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी ममता अनपढ़ हैं, लेकिन उन्हें कभी इस बात का मलाल नहीं रहा। उन्होंने अपनी बीबी ममता का माथा चूमकर कहा कि यह सही मायने में लक्ष्मी है।
मैं तो यही मानता हूं कि इतनी विपरीत परिस्थितियों में जिंदगी चल रही थी लेकिन ममता और उनके गांववासियों ने मेरा पूरा सहयोग दिया। पुणे से एमबीबीएस करने के दौरान पत्नी ममता ने पूरे परिवार को बांधे रखा।
इस वक्त मैं दिल्ली के एम्स के सर्जरी विभाग में बतौर सीनियर रेजीडेंट काम कर रहा हूं। आज पीजीआई से एमएस की डिग्री लेने लायक बना हूं तो इसमें भी मेरी पत्नी का बड़ा योगदान है।