पिछड़ी श्रेणियों में सिख जाटों को आरक्षण न दिए जाने पर पंजाब में केंद्र के नौ राज्यों में जाटों को आरक्षण दिए जाने के फैसले का विरोध शुरू हो गया है।
अखिल भारतीय जाट महासभा के प्रधान एवं कैप्टन अमरिंदर सिंह द्वारा इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री को पत्र भेजने के बाद सत्ताधारी शिअद को भी सिख जाटों को आरक्षण दिए जाने की याद आ गई।
पार्टी प्रधान सुखबीर बादल ने सोमवार को आनन-फानन में कोर कमेटी की बैठक बुला ली।
कोर कमेटी बैठक की अगुवाई करते हुए डिप्टी सीएम ने ओबीसी सूची में जाट सिखों को बाहर रखने के फैसले पर कें द्र सरकार की आलोचना की।
सुखबीर ने हरित क्रांति के जरिए देश को भुखमरी से बचाने वाले सिख जाटों के योगदान को याद करने की बात कही। मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने कहा कि यह भेदभाव पूर्ण रवैया केंद्र को खत्म करना चाहिए।
जाट महासभा के प्रधान कैप्टन अमरिंदर सिंह द्वारा केंद्र के फैसले के विरोध में पीएम को पत्र लिखे जाने की जानकारी मिलते ही शिअद ने खुद को इस गंभीर मुद्दे पर पिछड़ता हुआ महसूस किया।
इसलिए सुखबीर ने आनन-फानन में कोर कमेटी की बैठक बुलाकर जाट सिखों को आरक्षण दिए जाने की वकालत की। मालूम हो कि उत्तर प्रदेश और हरियाणा में जाट सिखों को आरक्षण की सुविधा है।
उधर, इस मामले में खुद को पिछड़ता महसूस कर प्रदेश कांग्रेस प्रधान प्रताप सिंह बाजवा ने भी प्रधानमंत्री को पत्र भेज कर केंद्र के फैसले पर अंगुली उठाई है।
मालूम हो कि जाटों को आरक्षण देने की मांग महासभा के प्रधान कैप्टन ने उठाई थी और इस संबंध में उन्होंने कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रधान सोनिया गांधी को नवंबर में पत्र भेजा था।