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Punjab: धरोहर नहीं बचा रहा रेलवे, अंग्रेजों के समय से बनी फिरोजपुर की डीआरएम दफ्तर को किया जाएगा ध्वस्त

Fri, 15 Jul 2022 05:00 PM IST
निवेदिता वर्मा अनिल कुमार, संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजपुर (पंजाब)

सार

म्यूजियम बनने से युवा पीढ़ी को रेलवे के इतिहास संबंधी जानकारी मिलती, रेलवे को आमदन होती और फिरोजपुर का विकास होता। यहां हुसैनीवाला बार्डर पर शहीदी स्मारक बना है, यहां पर बहुत पर्यटक आते हैं। 2006 में डीआरएम आफिस की नई इमारत तैयार हुई, उसके बाद से पुरानी इमारत खंडहर में तबदील हो गई।
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डीआरएम दफ्तर की पुरानी इमारत और उसमें रखा सामान। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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फिरोजपुर में डीआरएम दफ्तर की पुरानी इमारत को डिवीजन स्तरीय म्यूजियम में तबदील किए जाने की योजना थी। यहां पर अंग्रेजों के समय रेलगाड़ी को चलाने के लिए किन वस्तुओं का इस्तेमाल किया जाता था, उन्हें रखा जाना था। अब रेल अधिकारियों ने इसे ध्वस्त करने की तैयारी कर ली है। 
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पूरे पंजाब में 1905 में रेल पटरी बिछाई गई थी, जबकि कुछ जगह जैसे मुल्तान-लाहौर-अमृतसर के बीच 1865 व गंडा सिंह (पाक रेलवे स्टेशन)-हुसैनीवाला बार्डर (हुसैनीवाला रेलवे स्टेशन भारत) के बीच 1886 में ट्रैक बिछाया गया था। उसी समय अंग्रेजों ने रेल मंडल कार्यालय फिरोजपुर (डीआरएम दफ्तर की पुरानी इमारत) का निर्माण किया था। यह इमारत एक तरह से रेलवे की धरोहर है, जिसकी संभाल करनी चाहिए थी, अब इसे तोड़ दिया जाएगा।
 

बनाया जाना था डिवीजन स्तरीय म्यूजियम

रेलवे के इतिहास से संबंधित और अंग्रेजों के बनाए यंत्र उक्त इमारत में रखकर इसे डिवीजन स्तरीय म्यूजियम का रूप देना था। वर्ष 2009 में अंग्रेजों की पुरानी रेलवे से जुड़ी वस्तुएं एकत्र करना शुरू किया था, ये वस्तुएं डिवीजन के विभिन्न स्टेशनों के स्टोर और गेस्ट हाउस में पड़ी थी। इंजीनियरिंग विभाग ने पुरानी वस्तुओं की फोटो भी मंगवाई थीं। कुछेक पुरानी वस्तुएं लुधियाना, अमृतसर, पठानकोट, जालंधर व अन्य स्टेशनों इकट्ठी की गई थी, इनमें स्टेशनों पर बने अंग्रेजों के गेस्ट रूम में पड़ा चेहरा देखने वाला शीशा, ट्रैक बिछाने के लिए जमीन का लेवल देखने का यंत्र, ट्रेन को सिग्नल दिखाने वाले लैंप, जो केरोसिन से कार्य करते थे, रोड रोलर, पुराने कोयले वाले इंजन, तापमान नपाने वाला यंत्र, स्टेशनों पर लगे बड़ी घंटियां, मिक्सर व अन्य वस्तुएं शामिल थी। 

रेलवे के इतिहास से जुड़ी तमाम चीजें रखी जानी थी। इस कार्य के लिए अलग से स्टाफ गठित किया जाना था, लेकिन स्टाफ की कमी के चलते यह कार्य अधर में लटक गया। डीआरएम दफ्तर में अंग्रेजों के समय का रिकार्ड रूम है, इसमें रेलवे के पुराने दस्तावेज रखे हैं। यह रिकार्ड रूम साठ साल पुराना है, जहां पर 1924 तक की फाइलें देखी जा सकती हैं। 

रेलवे के इंजीनियरिंग विभाग से सेवानिवृत्त अधिकारी व खोजी लेखक राकेश कुमार का कहना है कि रेलवे की पुरानी वस्तुएं इकट्ठी करने का कार्य उन्हें सौंपा गया था। उन्होंने कई स्टेशनों से पुरानी वस्तुओं की फोटो लाकर अधिकारियों के समक्ष रखी थी। यहां पर सिग्नल विभाग, कंट्रोल रूम व अन्य रेलवे विभाग में अंग्रेजों के समय की पुरानी वस्तुएं रखी हैं। 
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इमारत को तोड़ने की तय की तारीख

रेल अधिकारियों ने पुराने डीआरएम आफिस की इमारत को तोड़ने की तारीख तय कर दी है। इसके मलबे की नीलामी 21 जुलाई को रखी गई है। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व तत्कालीन डीआरएम पुनियां ने फिरोजपुर और हुसैनीवाला बार्डर के बीच बिछी एतिहासिक रेल पटरी उखाड़ने का कार्य शुरू करवाया था, जिसे फिरोजपुर के लोगों ने प्रदर्शन कर रुकवाया था, क्योंकि यह एतिहासिक रेल पटरी है। भारत-पाक बंटवारे के समय इसी रेल ट्रैक पर पाक से आने वाले हिंदुओं के शवों से भरी ट्रेनें फिरोजपुर पहुंची थीं।  
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