पंजाब की सात इमिग्रेशन कंपनियों पर जालंधर पुलिस ने सोमवार को छापे मारकर सात एजेंटों को गिरफ्तार किया।
पुलिस का कहना है कि ये कंपनियां जाली दस्तावेजों पर स्टडी वीजा लगवाकर युवाओं को विदेश भेजती हैं। पुलिस को मौके से 42 पासपोर्ट और 20 लाख कैश भी मिला।
इसके अलावा इमिग्रेशन कंपनियों के कंप्यूटर, लैपटॉप, अन्य जरूरी दस्तावेज और वीजा के लिए आई फाइलें भी जब्त की गई हैं। छह इमिग्रेशन कंपनियां जालंधर और एक मोहाली की है।
डीसीपी जसप्रीत सिंह सिद्धू ने बताया कि एजेंटों से और भी कई खुलासे हो सकते हैं।
डीसीपी के मुताबिक ये कंपनियां स्टूडेंट्स के जाली शिक्षा प्रमाण पत्र, बैंक स्टेटमेंट, प्रापर्टी के सबूत तथा अन्य जाली दस्तावेज तैयार करती थीं। इनके लिए कंपनियां वीजा फीस के अतिरिक्त स्टूडेंट्स से छह से सात लाख रुपए ऐंठती थीं।
भेजते थे इन देशों में
ये कंपनियां युवाओं को स्टडी वीजा पर ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, कनाडा और अमेरिका भेजती थीं।
डीसीपी के मुताबिक ये कंपनियां कुरियर कंपनियों से मिलकर उन लोगों से भी पैसे ऐंठ लेती थीं, जिनके दस्तावेज सही होते थे।
इन कंपनियों पर कार्रवाई
- एक्सप्रेस स्टूडेंट एजुकेशन सर्विसेज
- पैरामाइड ई सर्विसेज
- स्कॉलर डेसनिटी इमिग्रेशन कंपनी
- इजी वे इमिग्रेशन कंसलटेंसी
- एमके इंटरप्राइजिज इमिग्रेशन सर्विसेज
- विदेश यात्रा डाट कॉम
- मोहाली की सी बर्ड कंसलटेंसी इमिग्रेशन कंपनी
कैसे करते थे ठगी
पुलिस का कहना है कि ये कंपनियां युवाओं को समाचार पत्रों तथा अन्य माध्यम से लुभाती थीं। इसके बाद उनके दस्तावेजों में खामियों निकालते थे। इनको दूर करने के लिए ही आवेदक से पैसे लिए जाते थे।
अगर जाली प्रमाण पत्रों के आधार पर किसी को वीजा मिल जाए तो उससे लाखों रुपए फीस के रूप में लेते हैं।