सरकारी अस्पतालों में अब गर्भवती मां और नवजात बच्चे की बेहतर देखभाल होगी। इसके लिए पंजाब के सेहत विभाग ने विशेष योजना बनाई है।
जिसके तहत राज्य के कई जिला और सब-डिवीजन अस्पतालों में मदर एंड चाइल्ड अस्पताल बनाए जाएंगे।
पंजाब सरकार का इस बात पर फोकस है कि ज्यादा से ज्यादा इंस्टीट्यूशनल डिलीवरी हों।
इसको प्रोत्साहित करने के लिए सरकार कई योजनाएं चला रही है। सरकारी अस्पतालों में डिलीवरी से लेकर दवाएं तक का खर्च सरकार उठा रही है।
गर्भवती महिलाओं के ट्रांसपोर्टेशन का खर्च भी दिया जा रहा है। इसी कड़ी में अब जिला और सब डिवीजनल अस्पतालों में मदर एंड चाइल्ड अस्पताल खोलने की योजना बनाई गई है।
ये अस्पताल तीस बेड के होंगे। इनमें गायनेकोलॉजिस्ट, पेडियाट्रीशियन के साथ-साथ ट्रेंड पैरा मेडिकल और नर्सिंग स्टाफ तैनात किया जाएगा। साथ ही नवजात शिशु के इलाज के लिए बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर भी मुहैया कराया जाएगा।
अभी तक ऐसे अस्पताल सिर्फ सिर्फ तीनों मेडिकल कॉलेजों में हैं। इनके अलावा बठिंडा और माता कौशल्या अस्पताल पटियाला में ऐसे सेंटर स्थापित किए गए हैं।
अब सरकार ने जिला व सब डिवीजनल अस्पतालों में भी ऐसे सेंटर बनाने की तैयारी की है। इस कड़ी में मोहाली, मानावाला, कोटकपूरा समेत छह अस्पतालों में मदर एंड चाइल्ड अस्पताल खोलने की कवायद शुरू कर दी गई है।
इसकी बिल्डिंग के निर्माण का काम निजी कंपनी को सौंपा जाएगा।
आईएमआर और एमएमआर घटाना मकसद
सेहत विभाग ज्यादा से ज्यादा इंस्टीट्यूशनल डिलिवरी को बढ़ावा दे रहा है।
गर्भवती महिलाओं और नवजात बच्चों की सेहत संभाल पर ध्यान दिया जा रहा है।
जिसका मकसद इन्फैंट मॉर्टेलिटी रेशियो और मैटरनल मॉर्टेलिटी रेशियो कंट्रोल करना है।
पंजाब में एमएमआर 172 प्रति एक लाख लाइव बर्थ है। जबकि, नेशनल रेशियो 212 है।
इसी तरह पंजाब में आईएमआर तीस प्रति एक हजार लाइव बर्थ है। जबकि, नेशनल रेशियो 42 है।