सिख जत्थेबंदियों के रोष प्रदर्शन के दौरान गुरदासपुर में पुलिस फायरिंग में हुई जसपाल सिंह की मौत के मामले में जांच टीम ने आरोपियों पुलिसकर्मियों के खिलाफ क्लोजर रिपोर्ट गुरदासपुर जिला अदालत में दाखिल कर दी है।
इसके बाद पुलिसकर्मियों के खिलाफ दर्ज इस मामले को बंद किया जा रहा है। यह जानकारी आईजी (क्राइम) जी नागेश्वर राव ने हाईकोर्ट में शपथ पत्र के जरिए दी।
हाईकोर्ट ने मामले की जांच की अंतिम रिपोर्ट मांगी थी। सिख जत्थेबंदी यह प्रदर्शन पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह हत्याकांड के दोषी बलवंत सिंह राजोआणा की फांसी की तारीख तय होने के बाद पंजाब में किए थे।
जांच टीम के सदस्य एसपी (क्राइम-2 अमृतसर) हरिंदरजीत सिंह ने हलफनामे में कहा है कि शिवसेना के प्रदर्शन के बाद कुछ शिवसैनिकों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था।
सिख जत्थेबंदियां इस मामले में गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रही थीं।
पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी समझा रहे थे, लेकिन कुछ सिख युवकों ने एसएसपी के सामने तलवारें लहरा दीं। स्थिति बेकाबू होते देख पर्याप्त आदेश लेकर हवाई फायरिंग की गई।
इस प्रकरण की वीडियो रिकार्डिंग में कहीं साबित नहीं होता कि जसपाल सिंह और रणजीत सिंह पर किसी ने गोली चलाई।
सीएफएसएल जांच में पता चला कि जसपाल सिंह की मौत हवलदार विजय की एके-47 की गोली से हुई थी। मारने की मंशा नहीं थी।
संभव है कि भाग दौड़ में पुलिस वालों का संतुलन बिगड़ गया हो और किसी वस्तु से टकराने के बाद गोली जसपाल को लग गई हो।
विजय कुमार की किसी को मारने की मंशा नहीं थी और वह बेकसूर है। हलफनामे में बताया गया है कि इस राइफल की बैरल में खराबी थी, जिसकी सर्विस नहीं हो सकती थी।
हलफनामे में बताया गया है कि जसपाल सिंह की मौत के संबंध में पुलिसकर्मियों के खिलाफ दर्ज मामला बंद करने के लिए अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की गई है, जिसके मंजूर होने की संभावना है।
हाईकोर्ट ने रिपोर्ट को रिकॉर्ड में लेकर अंतिम बहस के लिए 28 जुलाई की तारीख तय की है।
एएसआई की पिस्तौल की नहीं थी गोली
जसपाल सिंह के पिता ने बयान दिया था कि जसपाल की मौत एएसआई अजिंदर सिंह की पिस्तौल से निकली गोली से हुई।
अब रिपोर्ट में कहा गया है कि जसपाल सिंह के शरीर से पोस्टमार्टम के बाद निकली गोली का मिलान विजय की एके-47 से निक ली गोली से हो गया है। इस आधार पर एएसआई अजिंदर सिंह को क्लीन चिट दी गई है।