लोकसभा सदस्य हरसिमरत कौर बादल ने कहा है कि बठिंडा से पीपीपी-कांग्रेस के उम्मीदवार मनप्रीत सिंह बादल गिरगिट की तरह रंग बदल रहे हैं।
वह अपनी हार के लिए कांग्रेस में गलतियां निकाल रहें हैं, जबकि उसी पार्टी की बदौलत उन्हें लगभग 4.94 लाख मत मिले।
खास बात यह भी है कि वह उस पार्टी में गलतियां निकाल रहे हैं, जिसके चुनाव चिन्ह पर उन्होंने चुनाव लड़ा है।
मंगलवार को जारी बयान में हरसिमरत ने कहा कि कांग्रेस पार्टी द्वारा टिकट देकर समर्थन किए जाने पर बदले में धन्यवाद करने की बजाय मनप्रीत और उनके नज़दीकी कांग्रेसी नेताओं में कमी ढूंढ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मनप्रीत यह दर्शाने का प्रयास कर रहे हैं कि उनको मिली वोटें अधिकतर पीपल्स पार्टी ऑफ पंजाब के वोटरों ने ही डाली हैं, कांग्रेसियों ने नहीं।
उन्होंने कहा कि लकीर से हट चुकी पीपीपी को पुन: लाइन पर लाने का मनप्रीत का यह प्रयास सफल नहीं होगा, क्योंकि बीते दो वर्षो में पार्टी के सब साथी उन्हें छोड़ चुके हैं।
हरसिमरत बादल ने कहा कि मनप्रीत दावा कर रहे हैं कि उन्हें मिले 4.94 लाख वोट, उनके निजी प्रयास का नतीजा हैं।
ऐसा करके वह उस पार्टी की मान मर्यादा को ठेस पहुंचा रहे हैं, जिसने उनकी झोली में इतने मत डाले।
हरसिमरत ने कहा कि 2009 के चुनाव के दौरान उनके विरुद्ध खड़े कांग्रेसी उम्मीदवार रणइंद्र सिंह को 4 लाख के लगभग वोटें पड़ी थीं और वह 1.20 लाख से अधिक वोटों से हारे थे।
इस तरह यदि मान लिया जाए कि 2009 में सीपीआई को 20000 से कुछ अधिक वोट पड़ी थीं, तो स्पष्ट है कि मनप्रीत की पीपीपी और शिरोमणि अकाली दल (लौंगोवाल) दोनों ने मिलकर इस बार केवल 70000 के लगभग ही वोट प्राप्त की हैं।
उन्होंने कहा कि दूसरों में गलतियां निकालने की बजाय मनप्रीत स्वयं के गिरेबान में झांके की और गिदड़बाहा से लगातार चार बार विधायक बनने का गर्व न करें।
उन्होंने कहा कि उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि उनकी जीत की पीछे प्रकाश सिंह बादल का आशीर्वाद था।
उन्होंने कहा कि जैसे ही मनप्रीत ने अपने दम पर चुनाव लड़ा तो वह गिदड़बाहा से भी हार गए और मोड़ सीट भी उसके हाथ नहीं लगी।