पंजाब सरकार और कर्मचारियों के बीच चल रहे डीए विवाद के बीच मान सरकार ने कर्मचारियों को नया ऑफर दिया है। वित्तमंत्री हरपाल सिंह चीमा ने वीरवार को दावा किया कि पंजाब सरकार सूबे के कर्मचारियों को केंद्रीय कर्मियों के बराबर वेतन प्लस डीए देने को तैयार है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार केवल केंद्र के डीए प्रतिशत की नकल करने के बजाय समग्र वेतन पैकेज को केंद्र के बराबर करने के लिए तैयार है।
वित्तमंत्री ने दावा किया कि पंजाब अपने राजस्व का 51 फीसदी वेतन और पेंशन पर खर्च करता है, जो प्रमुख राज्यों में सबसे अधिक है। साथ ही पंजाब में कर्मचारियों का वेतन पड़ोसी राज्य हरियाणा, गुजरात, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश समेत अन्य राज्यों से अधिक है। वित्तमंत्री चीमा ने कहा कि डीए के बकाया भुगतान के लिए सरकार ने लिक्विडेशन प्लान बनाया हुआ है। इसके तहत चरणबद्ध भुगतान योजना के तहत बकाया डीए का किस्तों में भुगतान किया जा रहा है और आगे भी इसी तरह किया जाता रहेगा।
मंत्री अमन अरोड़ा और डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि यह बकाया शिअद-भाजपा गठबंधन और कांग्रेस के कार्यकाल का है, जिसे आम आदमी पार्टी की सरकार डीए की दर बढ़ाते हुए चुका रही है। लिहाजा कर्मचारियों को सरकार का सहयोग करना चाहिए, क्योंकि कर्मचारी प्रशासनिक व्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं। उन्हें विपक्षी दलों के बहकावे में नहीं आना चाहिए। सरकार कर्मचारियों के साथ फिर बातचीत के लिए तैयार है।
क्या है लिक्विडेशन प्लान?
पंजाब सरकार ने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के छठे वेतन आयोग के तहत लंबित डीए/डीआर के करीब 14,191 करोड़ रुपये के बकाये के भुगतान के लिए लिक्विडेशन प्लान तैयार किया है। इसके तहत सरकार ने पूरी राशि एकमुश्त देने के बजाय पांच वित्तीय वर्षों (2024-25 से 2028-29) में चरणबद्ध तरीके से भुगतान का प्रस्ताव रखा है। वित्तमंत्री का दावा है कि बकाये की अदायगी मासिक किस्तों के जरिये की जा रही है।
इसके तहत पेंशनभोगियों के लिए उम्र के आधार पर अलग-अलग किस्तों का प्रावधान किया गया था। 85 वर्ष से अधिक उम्र वालों को दो, 75 से 85 वर्ष वालों को 12 और 75 वर्ष से कम उम्र वालों को 42 मासिक किस्तों में भुगतान की रूपरेखा बनाई गई है। अब तक करीब 4500 करोड़ रुपये के बकाये का भुगतान किया जा चुका है। हालांकि, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने अगस्त 2026 में इस लिक्विडेशन प्लान को रद्द कर 14 दिनों में पूरा बकाया चुकाने का आदेश दिया। इसके खिलाफ पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दाखिल की है।
केंद्र-पंजाब के वेतन और डीए में फर्क
- पंजाब में क्लर्क इस वक्त 42 प्रतिशत डीए के हिसाब से टेक होम यानी हाथ में आने वाला शुद्ध वेतन 54,812 रुपये प्राप्त करते हैं जबकि केंद्र के अधीन क्लर्कों को 60 प्रतिशत डीए के साथ 36,960 रुपये वेतन मिलता है।
- इसी तर्ज पर पंजाब के ड्राइवर 40,612 रुपये वेतन पाते हैं जबकि केंद्र के ड्राइवरों को 36,960 रुपये मिलते हैं।
- पंजाब के स्टेनोग्राफर का वेतन 56,374 रुपये है जबकि केंद्र का 47,360 रुपये।
- पंजाब के ईटीटी टीचर का 67,592 रुपये वेतन मिल रहा है जबकि केंद्र के टीचरों का वेतन 65,760 रुपये है।
- पंजाब के पुलिस कांस्टेबल 54,812 रुपये वेतन पाते हैं, जबकि केंद्र के 36,960 रुपये।
- सरकार यदि पंजाब के कर्मचारियों को केंद्र की तर्ज पर 60 प्रतिशत डीए देती है तो कर्मियों का वेतन और बढ़ जाएगा।
कर्मचारियों का कड़ा रुख
बकाया डीए के लिए संघर्ष कर रही पंजाब कर्मचारियों की विभिन्न जत्थेबंदियों की ज्वाइंट एक्शन कमेटी के समन्वयक सुखचैन सिंह खैहरा समेत अन्य नेताओं ने कहा कि कर्मचारी किसी भी तरह से गुमराह नहीं हैं। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट पंजाब सरकार का लिक्विडेशन प्लान रद्द करते हुए बकाया डीए के भुगतान का आदेश दे चुका है। इसके बावजूद पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल कर दी है।
कर्मचारी नेताओं ने कहा कि इसके अलावा आंदोलन के तहत कर्मचारियों द्वारा सामूहिक अवकाश लेने के बावजूद उनके खिलाफ अनधिकृत रूप से अवकाश लेने पर कार्रवाई के नोटिस जारी किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार हाईकोर्ट का आदेश लागू नहीं करेगी और सुप्रीम कोर्ट से याचिका तथा कार्रवाई के नोटिस वापस नहीं लेगी, तब तक कर्मचारी किसी भी बात के लिए तैयार नहीं हैं।