किसान आंदोलन को एक साल पूरा हो गया है। तीनों कृषि कानूनों की वापसी को लेकर कैबिनेट में मुहर लग चुकी है, अब संसद की कार्यवाही बाकी है। किसान संगठनों ने 27 नवंबर की बैठक में आंदोलन को लेकर आगे की रणनीति तय करने की बात कही है। इस बीच आंदोलनकारी किसान नेताओं का सत्ता के प्रति रुझान दिखाई देने लगा है। ये सवाल उठ रहा है, क्या आंदोलन के बाद किसान नेता, सत्ता की नाव में सवार हो रहे हैं? पंजाब में उनकी पहली पसंद अरविंद केजरीवाल हैं, तो मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह 'चन्नी' की तरफ से भी उन्हें न्योता मिल रहा है। बड़े संगठनों के किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल और गुरनाम सिंह चढूनी का सियासत के प्रति मोह जगजाहिर हो चुका है। पिछले दिनों केजरीवाल के पंजाब दौरे में यह उम्मीद की जा रही थी कि वे मुख्यमंत्री पद के लिए भगवंत मान के नाम की घोषणा करेंगे, तो उन्होंने बड़ी चालाकी से यह कह कर बात को घुमा दिया कि मैं पंजाब का सीएम नहीं बनूंगा। जो भी सीएम बनेगा, वह एक सिख चेहरा ही होगा। पंजाब के लोग उस पर गर्व करेंगे। एक बड़े किसान नेता ने दावा किया है कि केजरीवाल के संपर्क में कई संगठनों के करीब 40 किसान नेता हैं। पार्टी उन्हें आगामी विधानसभा चुनाव में टिकट दे सकती है। ये नेता, किसान आंदोलन की शुरुआत से ही 'आप' के टच में रहे हैं।
केजरीवाल किसानों की स्थिति से वाकिफ थे, बढ़ाते रहे कदम
पिछले साल 26 नवंबर से दिल्ली की सीमाओं पर किसान आंदोलन शुरू हुआ था। 26 जनवरी को किसानों की ट्रैक्टर परेड के दौरान दिल्ली में लाल किला और दूसरे स्थानों पर हिंसा भड़क उठी थी। उसके बाद भी अरविंद केजरीवाल ने किसानों के प्रति पूरी हमदर्दी दिखाई। किसानों की हर संभव मदद की गई। केजरीवाल, खासतौर से पंजाब के किसान संगठनों की ताकत से वाकिफ थे। शुक्रवार को दिल्ली विधानसभा ने किसान आंदोलन के एक साल पूरा होने पर तीन प्रस्ताव पास कर दिए। इनमें वही बातें हैं, जिनकी किसान मांग कर रहे हैं। तीन प्रस्तावों में, एमएसपी पर कानूना बनाना, केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र को बर्खास्त करना और आंदोलन में मारे गए किसानों को मुआवजा देना व सभी पुलिस दर्ज वापस लेना शामिल है। चुनाव की दहलीज पर अब मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस प्रस्ताव के जरिए पंजाब के किसानों के प्रति दोबारा से अपनी हमदर्दी और सहयोग, दिखाने का प्रयास किया है।
पंजाब के एक बड़े किसान नेता का खुलासा
जैसे-जैसे पंजाब का चुनाव नजदीक आ रहा है, वैसे ही नए राजनीतिक समीकरण बन रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इस बार पंजाब में मुख्य मुकाबला कांग्रेस और आप के बीच होगा। बादल परिवार की स्थिति को ठीक नहीं बताया जा रहा। कांग्रेस छोड़ने के बाद पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह की राजनीतिक हालत अच्छी नहीं है। लंबे समय तक प्रदेश की कमान संभालने वाले कैप्टन, पंजाब में अकेले पड़ते हुए दिखाई दे रहे हैं। पंजाब से जुड़े एक बड़े किसान संगठन के नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि करीब 40 नेता केजरीवाल के संपर्क में हैं। किसान नेताओं के लिए राजनीतिक प्लैटफार्म की बात करें तो उन्हें इस वक्त केजरीवाल ही बेहतर नजर आ रहे हैं। केजरीवाल ने पिछले एक साल से किसानों की कई तरह से मदद की है। कैप्टन अमरिंदर सिंह के बारे में उक्त किसान नेता का कहना था कि कैप्टन का राजशाही अंदाज उन्हें ले बैठा। अब चन्नी सीएम बने हैं, वे कैप्टन के मुकाबले बहुत ठीक हैं। उनसे कोई भी व्यक्ति किसी भी समय मिल सकता है। उनकी तरफ से भी किसान संगठनों के नेताओं को कांग्रेस ज्वाइन करने का प्रस्ताव मिला है।
चढूनी ने राजनीतिक पार्टी बनाने का घोषणा की
टिकरी बॉर्डर पर मौजूद किसान नेताओं का कहना है कि 27 नवंबर को होने जा रही बैठक को लेकर अब ज्यादा कुछ नहीं बचा है। जो मुख्य मांग थी, वह पूरी हो गई है। अब एमएसपी को कानूनी अधिकार मिले, बिजली बिल का ड्राफ्ट वापस हो, प्रदूषण के लिए किसानों को सजा न मिले, किसानों पर दर्ज मुकदमा वापस हों, गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा को बर्खास्त किया जाए और शहीद किसानों के परिजनों को मुआवजा मिले, आदि मांगें सरकार के समक्ष रख दी गई हैं। शुक्रवार को किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने अपनी राजनीतिक पार्टी बनाने का एलान किया है। उन्होंने कहा है कि वे आगामी पंजाब चुनाव के मद्देनजर अपनी राजनीतिक पार्टी बना रहे हैं। चढूनी ने कहा, मैं चुनाव नहीं लड़ूंगा, मगर अपने प्रत्याशी मैदान में उतारेंगे। पंजाब में राजनीतिक के इस मॉडल को हरियाणा में भी आजमाया जाएगा। बता दें कि किसान आंदोलन में कई माह पहले जब चढ़ूनी ने यह बात कही थी तो उन्हें एक सप्ताह के लिए संयुक्त किसान मोर्चे से निलंबित कर दिया गया था। हालांकि एसकेएम ने अभी तक इस तरह की कोई जानकारी नहीं दी है। अविक साहा कहते हैं, एसकेएम चुनाव लड़ने के खिलाफ है। अभी किसानों के हितों के लिए संघर्ष बाकी है।
'तुसी चाहूंदे हो अगला सीएम होवें बलबीर सिंह राजेवाल'
कुछ माह पहले दिल्ली सीमा पर चल रहे किसान आंदोलन में भाकियू 'राजेवाल' के प्रमुख बलबीर सिंह राजेवाल के नाम से पोस्टर लग गए थे। इनमें लिखा था, 'तुसी चाहूंदे हो अगला सीएम होवें बलबीर सिंह राजेवाल'। किसान संगठनों ने इस बाबत गहरा एतराज जताया था। बाद में खुद बलबीर सिंह राजेवाल ने इन चर्चाओं को बेबुनियाद बताया था। पोस्टर पर भाकियू के प्रमुख राजेवाल की फोटो लगी थी। पंजाब के खन्ना में भी वैसे ही पोस्टर लग गए थे। राजेवाल ने किसान आंदोलन को खड़ा करने में अहम भूमिका अदा की है। वे पूरी ताकत से किसान आंदोलन को गैर सियासी और गैर धार्मिक बनाने की वकालत करते रहे हैं। किसान नेता ने बताया, विभिन्न संगठनों के नेताओं की सियासतदानों से बात शुरू हो गई है। ये बात केजरीवाल, चन्नी और दूसरे नेता भी जानते हैं कि मालवा क्षेत्र में राजेवाल का दबदबा रहा है। अगर राजेवाल किसी राजनीतिक पार्टी का हाथ थामते हैं तो उसे चुनाव में मदद मिल सकती है।