पंजाब सरकार ने डीजीपी सुमेध सिंह सैनी को पद पर बनाए रखने का एक और रास्ता निकाल लिया है।
सरकार द्वारा चुनाव आयोग से कहा गया है कि प्रदेश में चुनाव से संबंधित सारा कामकाज एडीजीपी (आईटी एंड टेली-कम्युनिकेशन) सीएसआर रेड्डी देखते हैं।
आगामी लोकसभा चुनाव में भी वही इस काम के नोडल अफसर होंगे। पुलिस कर्मचारियों की ड्यूटियों से लेकर, शिकायतों तक को एडीजीपी रेड्डी ही डील करेंगे। इस लिहाज से डीजीपी सैनी को बदलने की जरूरत नहीं है।
राज्य सरकार इससे पहले सैनी को बदलने की बजाय छुट्टी पर भेजने के विकल्प पर भी विचार कर चुकी है।
डीजीपी सैनी के खिलाफ पीपीसीसी प्रवक्ता सुखपाल सिंह खैहरा ने एक शिकायत भेजकर उन्हें बदलने की मांग चुनाव आयोग से की थी।
इस शिकायत का मुख्य आधार यह था कि सैनी पर तीन लोगों के गायब होने संबंधी एक केस में सीबीआई कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है।
इस पर आयोग ने पंजाब सरकार से जवाब मांगा था। इसके जवाब में प्रदेश के गृह विभाग ने चुनाव आयोग को भेजी अपनी रिपोर्ट में कहा था कि सैनी की डीजीपी के रूप में नियुक्ति को चैलेंज करती अलग-अलग याचिकाओं का आधार भी ऐसे ही आरोप थे, लेकिन अदालत इन याचिकाओं को रद्द कर चुकी है।
इसके अलावा दो आम चुनाव सैनी की नियुक्ति के बाद शांतिपूर्वक तरीके से हो चुके हैं, इसलिए उन्हें बदलने की जरूरत नहीं है। यह रिपोर्ट आयोग के विचाराधीन है।
आयोग ने किया रिपोर्ट पर विचार
जानकारी के अनुसार कांग्रेस की सैनी के खिलाफ शिकायतों और इन पर पंजाब सरकार की रिपोर्ट पर चुनाव आयोग की एक बैठक में विस्तार से विचार-विमर्श हुआ।
इस बारे में बात किए जाने पर केंद्रीय उप चुनाव आयुक्त डॉ. आलोक शुक्ला ने कहा कि पंजाब के डीजीपी सैनी को बदलने या न बदलने के संबंध में अभी कोई फैसला नहीं हुआ है।
इस बारे में निर्देश कोड ऑफ कंडक्ट लागू होने के बाद ही जारी होंगे।