पंजाब प्रदेश कार्यकारिणी के ऐलान के बाद बगावत करने वाले नेता विभिन्न कमेटियों में एडजस्ट होते ही खामोश हो गए हैं। प्रदेश प्रधान प्रताप सिंह बाजवा ने हाईकमान के जरिए कई नेताओं को विभिन्न कमेटियों का सदस्य बनवा दिया। इसके साथ ही बगावत पर काफी हद तक कंट्रोल भी कर लिया है।
प्रदेश कार्यकारिणी के ऐलान के बाद सबसे पहले बगावत का झंडा गुरकंवल कौर ने बुलंद किया था। बड़ी सफाई के साथ गुरकंवल कौर को उस अनुशासनात्मक कमेटी का सदस्य बना दिया गया, जो बागियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए बनी है। उसके बाद से वह शांत हैं।
जालंधर के सांसद मोहिंदर सिंह केपी ने भी कमेटी पर नाराजगी जताई थी। उन्हें उस ग्रीवांसेज कमेटी का चेयरमैन बना दिया गया, जो नाराज लोगों का पक्ष सुनेगी और अपनी रिपोर्ट हाईकमान को देगी।
उसके बाद से केपी भी चुप हैं और अन्य नेताओं का पक्ष लेने की तैयारी कर रहे हैं। एक और पूर्वमंत्री लाल सिंह भी कमेटी से खफा थे। उन्हें भी इसी कमेटी का मेंबर बना दिया गया।
प्रदेश महिला कांग्रेस प्रधान डॉ. मालती थापर ने कमेटी में महिलाओं को नजरंदाज करने का आरोप लगाया था। ग्रीवांसेज कमेटी में शामिल होते ही उनके सुर बदल गए।
डॉ. मालती ने कहा कि थोड़ी नाराजगी जरूर है, पर जल्द ही उसे दूर कर लिया जाएगा। कुछ लोगों को प्रमोट किया जाएगा, कुछ नए लोगों को कार्यकारिणी में एडजस्ट किया जाएगा, इसके बाद सब ठीक हो जाएगा। नाराज नेताओं को एडजस्ट करने की कड़ी में सबसे नया नाम विधायक अश्वनी सेखड़ी का है।
सेखड़ी की अगुवाई में पार्टी के हिंदू नेताओं ने लामबंद होकर हिंदुओं और शहरियों को नजरंदाज करने का आरोप लगाया था। अब एआईसीसी सचिव सेखड़ी की अगुवाई में एक कमेटी बनाई गई है।
जो प्रदेश कांग्रेस द्वारा 19 जनवरी से किए जा रहे सत्याग्रह की कमान संभालेगी। सेखड़ी ने कहा कि पार्टी के सामने पक्ष रखा गया था कि शहरियों को नजरंदाज किया गया। पार्टी ने यह कमी दूर करने का भरोसा दिया है।