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Punjab CM Face: अभी नहीं खत्म होगी कांग्रेस की परेशानी, ये तीन चुनौतियां बढ़ाएंगी चन्नी की मुश्किलें

Sun, 06 Feb 2022 06:20 PM IST
हिमांशु मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पंजाब में कांग्रेस के सीएम चेहरे से सस्पेंस हट गया है। अगर विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत होती है तो मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी आगे भी अपने पद पर बने रहेंगे। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि पंजाब के लोगों को गरीब घर का बेटा चरणजीत चन्नी ही मुख्यमंत्री के तौर पर चाहिए। 
 
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पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पंजाब कांग्रेस की सियासत में मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर लंबे समय से चल रही उथल-पुथल पर आखिरकार विराम लग ही गया। राहुल गांधी ने रविवार को नवजोत सिंह सिद्धू के सेलिब्रिटी चेहरे के आगे चरणजीत सिंह चन्नी के दलित चेहरे का चुनाव किया। 
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ऐसा नहीं है कि ये अचानक हुआ। इसके कयास काफी पहले से लगाए जा रहे थे। तय माना जा रहा था कि चरणजीत सिंह चन्नी ही कांग्रेस की तरफ से मुख्यमंत्री पद के दावेदार होंगे। हां, पार्टी के अंदर जरूर सिद्धू और सुनील जाखड़ को लेकर कुछ लोग चर्चा कर रहे थे। चुनाव से ठीक पहले पार्टी में कोई फूट न पड़े इसके चलते राहुल गांधी को सीएम चेहरे का चुनाव करके और फिर उसका एलान करना पड़ा। अब सवाल उठता है कि आखिर चन्नी को ही क्यों सीएम का चेहरा घोषित किया गया और क्या इस एलान भर से पार्टी के अंदर चल रही घमासान खत्म हो जाएगी? इसे जानने के लिए पढ़ें ये पूरी रिपोर्ट....

पहले जान लीजिए चन्नी ही क्यों?
पंजाब की राजनीति में 20 सितंबर 2021 का दिन काफी अहम था। यही वह दिन था जब पंजाब के तकनीकी शिक्षा मंत्री रहे चरणजीत सिंह चन्नी को अचानक मुख्यमंत्री बना दिया गया था। गांधी परिवार के करीबी रहे कैप्टन अमरिंदर सिंह को हटाकर अचानक कांग्रेस आलाकमान ने चन्नी के नाम पर दांव खेला था। पंजाब कांग्रेस का अध्यक्ष होते हुए भी नवजोत सिंह सिद्धू मुख्यमंत्री बनने का ख्वाब पूरा नहीं कर पाए। 
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खैर, कांग्रेस हाईकमान का ये दांव काम आ गया। पंजाब को पहला दलित मुख्यमंत्री मिल गया और इसी के साथ चरणजीत चन्नी का ग्राफ काफी तेजी से ऊपर बढ़ गया। पंजाब में 32% दलित वोट बैंक है और आज तक इस वोट बैंक को साधने के लिए किसी ने दांव नहीं खेला था। कांग्रेस ने चन्नी के नाम पर मुहर लगाकर इस 32% वोटबैंक पर निशाना साधा है। 

अब सवाल उठता है कि सिद्धू और सुनील जाखड़ को क्यों नहीं चुना गया? इसका सीधा सा जवाब है। सिद्धू जट्टसिख समाज से आते हैं। सिद्धू को न चुनने का बड़ा कारण उनका ज्यादा बोलना भी है। कई बार सिद्धू इतना कुछ बोल जाते हैं कि उनकी पार्टी के नेता ही असहज हो जाते हैं। पंजाब में उनकी कम्युनिटी के करीब 19% वोट हैं। 
वहीं, सुनील जाखड़ पंजाब कांग्रेस के बड़े हिंदू नेता हैं। यूं तो पंजाब में हिंदू वोटर्स की संख्या करीब 39% है, लेकिन सिखों से काफी कम है। यही कारण है कि राजनीतिक पार्टियां सिखों पर ही अपना दांव चलती हैं।

चेहरा तो ठीक, लेकिन सिद्धू क्या चन्नी की चलने देंगे? 
मुख्यमंत्री चेहरे के एलान के बाद दो और सवाल खड़े होते हैं। पहला यह कि क्या सिद्धू इतनी आसानी से कांग्रेस नेतृत्व के फैसले को स्वीकार कर लेंगे? और दूसरी यह कि आने वाले दिनों में चन्नी के सामने क्या-क्या मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं? इन दोनों ही सवाल का जवाब जानने के लिए हमने वरिष्ठ पत्रकार दीपक यादव से बात की। दीपक लंबे समय से पंजाब की राजनीति को कवर कर रहे हैं। उन्होंने आने वाले दिनों में चन्नी के सामने खड़ी होने वाली तीन चुनौतियों के बारे में बताया।

1. नवजोत सिंह सिद्धू पर काबू पाना : अगर कांग्रेस चुनाव जीतती है और चन्नी फिर से मुख्यमंत्री बनते हैं तो उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती नवजोत सिंह सिद्धू ही होंगे। तीन महीने के कार्यकाल में चन्नी इस बात से दो-चार भी हो चुके हैं। सिद्धू चन्नी के हर फैसले के खिलाफ खड़े हो जाते हैं और खुद की फैसले को मनवाने के लिए दबाव बनाते हैं।

2. संगठन और सरकार में तालमेल बनाना : अभी कांग्रेस ने टिकट बंटवारे में नवजोत सिंह सिद्धू की हर बात मानी है। ऐसा बताया जाता है कि 70% टिकट सिद्धू के कहने पर ही दिए गए हैं। ऐसे में सरकार बनने के बाद सिद्धू के पक्ष वाले विधायक चन्नी के लिए मुसीबत पैदा कर सकते हैं।

3. खुद की छवि पर लगे दाग मिटाना : अभी चन्नी काफी विवादों में हैं। तीन महीने के अंदर ही उनपर कई तरह के आरोप लग चुके हैं। चन्नी के भतीजे को अभी ईडी ने अवैध खनन के मामले में गिरफ्तार किया है। विपक्ष और खासतौर पर आम आदमी पार्टी के नेता इस बात को जोरशोर से उठा रहे हैं। उनका आरोप है कि जिस सीएम ने तीन महीने में ही पंजाब को लूट लिया वह पांच साल के लिए बन गया तो क्या हाल होगा?
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