पंजाब सरकार ने औद्योगिक इकाइयों को प्रॉपर्टी और अन्य टैक्सों से हो रही दिक्कतों से निजात दिलाने के लिए उद्योगों को रिहायशी और कॉमर्शियल न मानकर एक अलग स्लैब बनाने का फैसला लिया है।
अब चालू कॉमर्शियल कलेक्टर रेट के 75 प्रतिशत पर ही डेढ़ प्रतिशत प्रॉपर्टी टैक्स वसूला जाएगा।
स्थानीय निकाय मंत्री अनिल जोशी ने बताया कि पंजाब भाजपा प्रधान कमल शर्मा के नेतृत्व में उद्योग मंत्री मदनमोहन मित्तल और उद्योगपतियों के साथ अमृतसर में बैठक होने के बाद उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल ने यह फैसला लिया है।
जोशी ने बताया कि इस फैसले में उद्योगों को भारी राहत दी गई है।
उनके अनुसार यदि किसी क्षेत्र में कॉमर्शियल के लिए कलेक्टर रेट दस हजार रुपये प्रति गज है तो उद्योग से उसका 75 प्रतिशत अर्थात 7500 रुपये प्रति गज पर ही नियत 1.5 प्रतिशत प्रॉपर्टी टैक्स वसूला जाएगा।
उन्होंने बताया कि जिन उद्योगों ने इस फैसले से पूर्व प्रॉपर्टी टैक्स जमा करवा दिया है, उनको रिफंड दिया जाएगा या आगामी वर्ष के प्रॉपर्टी टैक्स में एडजस्ट कर दिया जाएगा।
जोशी ने बताया कि इस फैसले से पूर्व उद्योगों को कॉमर्शियल कैटेगरी में रखा गया था।
पुराने उद्योग जो अस्तित्व में हैं, वे बड़े रकबे में बने होने के कारण कलेक्टर रेट से प्रॉपर्टी टैक्स गणना करते समय उनका प्रॉपर्टी टैक्स काफी बढ़ जाता था।
उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल ने ‘पंजाब ब्यूरो आफ इनवेस्टमेंट प्रमोशन की स्थापना को मंजूरी दे दी है।
इसको उद्योग स्थापना के लिए हर प्रकार की मंजूरियां देने की शक्ति होगी।
उद्योग मंत्री मदन मोहन मित्तल और स्थानीय निकाय मंत्री अनिल जोशी के अतिरिक्त विभागों के प्रधान सचिवों की एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए बादल ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस संबंध में बिल को आगामी केबिनेट में पेश किया जाए ताकि औद्योगिक मंजूरियों एवं उद्योगों को आ रही मुश्किलों को दूर करने के लिए ब्यूरो शीघ्र कार्य आरंभ कर सके।
उन्होंने कहा कि देश की पहली ब्यूरो ऑफ इनवेस्टमेंट प्रमोशन आगामी पंजाब निवेशक सम्मेलन से पहले अपना काम शुरू कर देगी।
इकलौते आवेदन पर मिलेगी सभी स्वीकृतियां
उन्हाेंने बताया कि ब्यूरो के कामकाज की निगरानी एक मुख्य कार्यकारी अधिकारी करेगा।
वह अधिकारी निवेशक द्वारा दिए इकलौते आवेदन पर निवेश के लिए आवश्यक सभी स्वीकृतियां देगा।
मुख्य कार्यकारी अधिकारी द्वारा नए निवेश प्रस्तावों एवं पुराने यूनिटों की क्षमता बढ़ाने आदि संबंधी आवेदन प्राप्त करने, उसकी प्रक्रिया संपूर्ण करने एवं निवेश प्रस्तावों को पास करने का काम होगा।
निवेशक को रियायतें देने संबंधी भी इस अधिकारी द्वारा ही योग्य घोषित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री इस ब्यूरो के चेयरमैन होंगे, जबकि उप मुख्यमंत्री को-चेयरमैन होंगे।
गवर्निंग बॉडी में वित्त, कृषि, स्वास्थ्य, पर्यटन, श्रम, फूड प्रोसेसिंग, आई टी, हाउसिंग, स्थानीय निकायों, विज्ञान प्रौद्योगिकी मंत्री भी शामिल हाेंगे, जबकि मुख्य सचिव एवं संबंधित प्रबंधकीय सचिव सदस्य सचिव के तौर पर शामिल किया जाएगा।